बृज के कण कण में कृष्ण और उनकी रास लीला बसी है और इस क्षेत्र के सदियों पुराने लोकगीतों में इसकी झलक सुनने को मिलती है। इन्हीं गीतों को संजोने का काम कर रहीं हैं बृज की रहने वाली लोकगायिका डॉ सीमा मोरवाल। डॉ मोरवाल ने लगभग साढ़े दस हज़ार लोकगीतों को स्वरलिपिबद्ध किया है। इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को ये जानकारी रहेगी कि बृज के लोकगीतों को कैसे गाया जाता है।
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