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ब्रज के हज़ारों लोकगीतों को संजोने का काम कर रहीं हैं लोकगायिका सीमा मोरवाल

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Dr Seema Morwal Credit: Dr Seema Morwal

बृज के कण कण में कृष्ण और उनकी रास लीला बसी है और इस क्षेत्र के सदियों पुराने लोकगीतों में इसकी झलक सुनने को मिलती है। इन्हीं गीतों को संजोने का काम कर रहीं हैं बृज की रहने वाली लोकगायिका डॉ सीमा मोरवाल। डॉ मोरवाल ने लगभग साढ़े दस हज़ार लोकगीतों को स्वरलिपिबद्ध किया है। इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को ये जानकारी रहेगी कि बृज के लोकगीतों को कैसे गाया जाता है।


Published

By Natasha Kaul

Presented by Faisal Fareed

Source: SBS


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बृज के कण कण में कृष्ण और उनकी रास लीला बसी है और इस क्षेत्र के सदियों पुराने लोकगीतों में इसकी झलक सुनने को मिलती है। इन्हीं गीतों को संजोने का काम कर रहीं हैं बृज की रहने वाली लोकगायिका डॉ सीमा मोरवाल। डॉ मोरवाल ने लगभग साढ़े दस हज़ार लोकगीतों को स्वरलिपिबद्ध किया है। इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को ये जानकारी रहेगी कि बृज के लोकगीतों को कैसे गाया जाता है।


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