Australia’s Defence Minister Richard Marles has sparked a major debate with the 2026 National Defence Strategy, setting an ambitious target to lift defence spending to 3 per cent of GDP. The government calls it a historic investment in national security, but the opposition accuses Labor of “artificially inflating” the figures. So the real question is: is Australia actually becoming more secure or just making its defence budget sound bigger on paper? Let’s break down what’s really happening behind the headlines with international affairs expert Dalbir Ahlawat.
(Disclaimer: The views/opinions expressed in this interview are the personal views of the individual. SBS neither agrees nor disagrees with them.)
Find our podcasts here at SBS Hindi Podcast Collection. You can also tune in to SBS Hindi at 5 pm on SBS South Asian on digital radio, on channel 305 on your television, via the SBS Audio app or stream from our website.
[intro music]
नमस्कार दोस्तों, आप जुड़े हुए हैं भव्या पांडे के साथ और आज हम बात करेंगे ऑस्ट्रेलिया की उस बड़ी घोषणा की जिसने रणनीति और आंकड़ों दोनों पर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या देश सच में रक्षा पर record निवेश कर रहा है या फिर यह सिर्फ आंकड़ों की एक नई परिभाषा है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री Richard Marles ने घोषणा की है कि ऑस्ट्रेलिया 2033 तक अपने रक्षा खर्च को GDP के 3% तक ले जाएगा। इसे सबसे बड़ा शांतिकालीन रक्षा विस्तार भी बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह कदम बदलते वैश्विक हालात जैसे Indo-Pacific में बढ़ता तनाव, cyber खतरे और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आवश्यक है। साथ ही सरकार यह भी कह रही है कि इसमें सिर्फ सेना का बजट नहीं बल्कि infrastructure, cyber सुरक्षा और रक्षा उद्योग से जुड़े निवेश भी शामिल होंगे। तो बस यहीं से शुरू होती है यह बहस। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह 3% का आंकड़ा सीधा-साधा नहीं है। आरोप है कि सरकार ने North Atlantic Treaty Organisation की गणना पद्धति अपनाई है, जिसमें सिर्फ सैन्य खर्च ही नहीं बल्कि कुछ अतिरिक्त चीजें जैसे, जैसे pension और support खर्च भी जोड़ दिए जाते हैं। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि इससे आंकड़ा बड़ा दिखता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि सीधे लड़ाकू क्षमता या हथियार पर इसे खर्च किया जा रहा हो। वहीं सरकार का कहना है कि यह तरीका अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए जरूरी है ताकि देशों के बीच apples to apples तुलना हो सके। हालांकि कई रणनीति विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका तर्क है कि GDP का प्रतिशत देखना अपने आप में पूरी तस्वीर नहीं दिखाता है। असली सवाल यह है कि पैसा किस चीज पर खर्च हो रहा है, नए हथियारों पर, तकनीक पर या सिर्फ प्रशासनिक खर्च पर। ऐसे में कुछ विशेषज्ञ इसे creative accounting कह रहे हैं, जबकि अन्य इसे रणनीतिक मजबूरी मानते हैं। तो यह बहस सिर्फ आंकड़ों की नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया अपनी सुरक्षा को किस तरह से परिभाषित कर रहा है, इस बात की है। तो इस मुद्दे को हमें गहराई से समझाने के लिए और साथ ही कुछ सवालों के जवाब देने के लिए आज हमारे साथ जुड़े हैं Macquarie University के Department of Security Studies and Criminology के Professor और रक्षा expert दलबीर अहलावत।
Thank you भव्या जी।
तो दलबीर जी मैं जानना चाहूंगी कि यह जो नई Defence Strategy Labour की तरफ से आई है, इसे हम अगर आसान भाषा में समझना चाहें तो किस तरह के बदलाव आए हैं?
देखिए, पहले मैं थोड़ा सा आपको इसकी भूमिका बताता हूं कि अभी बहुत, अभी पूरी दुनिया में एक हलचल मची हुई है। तो यह एक बहुत ही अहम समय है और इस समय पर यह release की गई है। तो यह आज के दिन जो challenges हैं ऑस्ट्रेलिया के लिए, यह उनको दर्शाता है। तो इसमें क्या है कि पहले जो यह हमारा focus था America focused foreign policy, defence policy, security policy थी। क्योंकि हम अमेरिका के alliance partner हैं। तो उस alliance partnership में हमारी dependency थी। हम छोटे partner थे उस बड़ी alliance system में। उसके बाद हम Quad, हमने Quad sign किया जिसमें कि चार देश हैं ऑस्ट्रेलिया, इंडिया, जापान और United States। एक वो collective था। तो इसके बाद हमने AUKUS sign किया जिसमें ऑस्ट्रेलिया, United Kingdom और United States तीन देश हैं, जिसमें कि ऑस्ट्रेलिया nuclear submarine बनाएगा, लेकर आएगा। लेकिन अब भी जो यह, यह 2026 की National Defence Strategy अभी issue हुई है, इसमें काफी बदलाव आए हैं। कुछ में क्या है कि जो पहले से active थे, उनको आगे strengthen किया गया है और कुछ नए issues भी इसमें add किए गए हैं जो आज के समय के challenges को दर्शाते हैं। इसमें सबसे पहले जो है, इसमें दर्शाया गया है कि ऑस्ट्रेलिया अब लंबे समय को देखते हुए self reliance चाहता है। यह आत्मनिर्भर चाहता है अपने defence sector में। जिससे कि जो, यदि जो बाहर से हमारे ऊपर जो challenges आ रहे हैं, उनको ऑस्ट्रेलिया neutralize कर सके, deter कर सके। फिर इसके लिए, इसको implement करने के लिए, इसलिए अपनी capability को बढ़ाना चाहता है और उसमें capability का एक जो अहम हिस्सा है जो कि 2024 के National Defence Strategy में भी दिखाया गया था और 2023 के Defence Strategic Review, Review में भी दर्शाया गया था, वह है strategy of denial. इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि हम अपने border के ऊपर ना बैठे कि जब border पर कोई समस्या आएगी तो हम उसका, उसका हल सोचेंगे या हम उसका response करेंगे। हम अपने region wide एक policy है और जहां भी balance of power में shift होती है तो वहां पर ऑस्ट्रेलिया बहुत ही अहम role play करेगा। क्योंकि अब हमने देखा है कि जैसे यूक्रेन में Russia-Ukraine war है। Russia-Ukraine war को चार साल से ज्यादा हो गए और वहां पर technology का ज्यादा use है। Human beings का या traditional armed forces का कम role है। इसी तरह से हमने देखा है कि Middle East में अमेरिका और ईरान के बीच में काफी technological innovation है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया अपनी, ऑस्ट्रेलिया अपने आप को एक मजबूत देश बनाना चाहता है और अपना संप्रभुताइसके आधार पर एक Defense Industrial Base भी बनाना चाहता है। तो इसके लिए इसके पास कुछ जो मुद्दे उठाए गए हैं 2026 की National Defense Strategy में number एक, यह अपना, अपनी Defense Industry को अभी शुरू करेगा। Number दो,
यह, यह अपने Regional Partner के साथ भी cooperate करेगा जैसे कि भारत है, Japan है। इन देशों को यह के मध्य नजर रखते हुए यह Interoperability या Joint Defense Protection जैसी, जैसी चीजों पर अभी काफी आगे विस्तार होगा। और खासकर भारत के, भारत को देखते हुए अभी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई में Australia में आएंगे तो उस time लगता है कुछ बड़े agreement भी sign होंगे। इसी तरह से Japan के साथ भी काफी हमारे संबंध सुधरे हैं और Interoperability काफी बढ़ी है। जिससे कि उनकी Self Defense Forces Australia में आ सकती हैं और Australia के
Armed Forces Japan में जाकर exercise कर सकते हैं। तो यह, यह मुख्य, मुख्य जो है इस नई, नई
strategy का हिस्सा है।
बहुत-बहुत धन्यवाद। एक सवाल पूछना चाहूंगी कि यदि हम experts की मानें तो रक्षा budget में सबसे ज्यादा निवेश कहां होना चाहिए? हथियारों की ओर, cyber सुरक्षा या infrastructure की ओर?
देखिए, इसमें दो पहलू हैं इसको जानने के लिए। अभी दर्शाया गया है कि अगले 10 साल में 425 billion dollar invest किया जाए और आपने बहुत ही अहम सवाल पूछा है कि कहां पे, कहां पे इसको किया जाए। देखिए, जो Defense Budget है उसमें होता है कि एक force दूसरी force से अलग नहीं हो सकती। तो हमारे जो पांच जो main हैं,
जो पांच main हैं, हमारी Army है, Navy है, Air Force है, Cyber Capability है, Space Force है। ये पांचों को एक United, United Force की तरह काम करना पड़ता है। इसलिए इनका एक Centralized Integrated Domain है और उस domain में सभी forces को collectively काम करना है। एक यह हो गया कि यह operational है। दूसरा यह कि weaponry है। Weapon, देखो अभी यदि Australia में बहुत बड़ा industrial base नहीं है अभी। यदि Australia self reliance की बात करता है तो इसको काफी investment करना पड़ेगा और जो यह 425 billion,
जो 425 billion dollar की बात है, यह अगले 10 साल में लगेंगे। तो इसलिए काफी पैसा वहां industrial production में भी लगाना पड़ेगा। तो यह लगता है कि जैसे कि Australia अपने आप करना, indication यह है कि Australia self reliant हो। लेकिन ऐसे में कोई भी देश self reliant नहीं है। America भी नहीं है और देश भी नहीं है। तो इसलिए इसका regional जो partnership है जैसे भारत है, भारत में labor force है, उनके पास और expertise है, वह Australia use कर सकता है। भारत, Australia की advanced capabilities use कर सकता है। वही Japan की high level technology है। तो एक तरह से इनको एक partnership बनानी पड़ेगी और उस partnership में इनको cost sharing करने से काफी फायदा हो सकता है।
दलबीर जी आपका आज SBS Hindi से जुड़ने के लिए और हमें अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।
धन्यवाद।
SBS News के लिए इस खबर को आप सबके लिए SBS Hindi में लेकर आई फव्या पांडे।




