ग्लोबल बिजनस कोएलिशन फॉर एजुकेशन, एजुकेशन कमिशन और यूनिसफे के एक संयुक्त अध्ययन के मुताबिक दक्षिण एशियाई देशों के आधे से ज्यादा युवाओं के पास अगले दशक में रोजगार के लिए जरूरी योज्ञता नहीं होगी.
इस अध्ययन में जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 2030 में भारत के 47 फीसदी युवाओँ के पास रोजगार के लिए जरूरी योज्ञता नहीं होगी. हालांकि इस मामले में बांग्लादेश और भूटान की स्थिति भारत से भी खराब हो सकती है. अनुमान है कि बांग्लादेश के 55 फीसदी और भूटान के 81 फीसदी युवा 2030 में रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे होंगे.
यूनिसेफ की निदेशक हेनरिटा फोर ने एक बयान में कहा, "एक विशाल स्टेडियम के बराबर, यानी करीब एक लाख युवा हर रोज रोजगार के लिए बाजार में आ रहे हैं. लेकिन इनमें से लगभग आधे 21वीं सदी की नौकरियों के लिए तैयार नहीं हैं."
उन्होंने कहा, "दक्षिण एशिया इस वक्त एक महत्वपूर्ण दोराहे पर है. अपनी आबादी के योग्य और सक्षम युवाओं का लाभ उठाने के लिए उसके पास कम ही वक्त बचा है. सही कदम लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाल सकते हैं. और गलत कदम से आर्थिक वृद्धि लड़खड़ाएगी, युवाओं में निराशा बढ़ेगी और प्रतिभाएं दूसरे क्षेत्रों की ओर चली जाएंगी."
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया में 2040 तक दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति सक्रिय होगी. विशेषज्ञों की राय है कि यदि स्किल डिवेलपमेंट पर निवेश किया जाए तो दक्षिण एशिया में आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं पैदा हो सकती हैं.
यूनिसेफ ने 32 हजार युवाओं से बातचीत के आधार पर 'वॉइसेज ऑफ यूथ' अध्ययन किया है. 24 वर्ष से कम आयु के इन युवाओं में से ज्यादातर मानते हैं कि उनकी शिक्षा पुराने ढंग की है.
26 फीसदी ने कहा कि उनके पास काम का अनुभव नहीं है. 23 फीसदी ने कहा कि उन्हें रोजगार के लिए तैयार होने के वास्ते जरूरी मदद नहीं मिली. और 44 फीसदी ने माना है कि रिश्वतखोरी और भेदभाव उनके आड़े आ रहे हैं. इन सब वजहों से ग्रैजुएशन के बाद भी रोजगार पाने में युवाओं को संघर्ष करना पड़ रहा है.
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