52 वर्षीय कुलदीप सिंह मान का दावा है कि वह पीएचडी के दो पेपर्स में फेल किए जाने के कारण उनका करियर और प्रतिष्ठा दोनों बर्बाद हो गए हैं.
मान एक 7/11 स्टोर में काम करते हैं. उन्होंने जेम्स कुक यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने के लिए दाखिला लिया था. उनका दावा है कि यूनिवर्सिटी ने उन पर नकल करने का झूठा आरोप लगाया और उनके सुपरवाइजर ने कहा कि उनकी दिलचस्पी पढ़ाई में कम और काम करने में ज्यादा है.
क्वीन्सलैंड के सुप्रीम में दाखिल अर्जी में मान ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी ने समझौता करने की एवज में धन की पेशकश की थी. उन्होंने कहा, “मुझे 52 हजार 576 डॉलर के मुआवजे की पेशकश की गई थी क्योंकि यूनिवर्सिटी के पैनल ने मेरे हक में फैसला दिया था.”

लेकिन मान ने यह धन लेने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक उनकी पीड़ा के हिसाब से यह बहुत कम था.
टाउन्सविल कैंपस में 2015 में पीएचडी की शुरुआत करने वाले कुलदीप मान कहते हैं कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें सिर्फ फीस ऐंठने के लिए दाखिला दिया.
“मेरी साख और करियर दोनों हमेशा के लिए बर्बाद हो गए हैं. इस कारण मुझे डिप्रेशन हुआ और मैं आज भी मानसिक पीड़ा से लड़ रहा हूं.”
जेम्स कुक यूनिवर्सिटी ने इस मामले पर यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि मामला अदालत में है.
यूनिवर्सिटी के वकील ने मान को एक पत्र लिखकर कहा है कि उनका दावा अदालत की प्रक्रिया के मुताबिक नहीं है और यूनिवर्सिटी ना सिर्फ इस मुकदमे को खारिज कराने की अपील करेगी बल्कि मान को मुकदमे का खर्च भी देना होगा.
मान के पास अपने दावों में बदलाव करने के लिए 31 मई तक का समय है. हालांकि वह अभी तक कानूनी मदद का इंतजाम नहीं कर पाए हैं और उन्होंने मुफ्त कानूनी मदद के लिए अर्जी दी है.
