पक्षियों में भी जान होती है, इनमें भी आत्मा होती है। ये मानना है चंडीगढ़ के निवासी मंजीत सिंह उर्फ़ प्रिंस मेहरा ने जो मृत पक्षियों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार करते हैं और बीमार पक्षियों का इलाज करते हैं। साल 2011 में जब प्रिंस मेहरा कुछ स्कूल के बच्चों के साथ टूर पर गए, उस समय उन्हें एक पक्षी मृत पड़ा दिखा , पूछने पर पता चला की उसके शव को फेंका जायेगा। इस बात से वो काफी दुखी हुए। यहीं से शुरुवात हुई उनकी एक ऐसे यात्रा की जिसे वे पिछले 30 सालों से चला रहे है। प्रिंस मेहरा ने अपनी साइकिल को बर्ड एम्बुलेंस में परिवर्तित किया है और वे हज़ारो पक्षियों का इलाज कर चुके हैं। वे बहुत से पक्षियों का अंतिम संस्कार भी कर चुके है।
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