भारत के राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाते हुए, डॉ. गुहा 1900 के दशक की शुरुआत की कुछ ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में बताती हैं, जिनकी वजह से अंग्रेजों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।
डॉ. गुहा ने कहा, "प्रतिबंध से लोग रुके नहीं, इसके बजाय, इसने आंदोलन को और तेज़ और मज़बूत किया। इससे नारे और ज़्यादा लगने लगे। ज़्यादा लोगों ने इन शब्दों का बोलना शुरू कर दिया।"

Dr Srishti Guha, a cultural historian with various research and teaching roles at the School of Humanities and Social Science, University of Newcastle and affiliated with the Purai Global Indigenous History Centre. Source: Supplied / Srishti Guha
बंकिम चंद्र चटर्जी ने बंगाली और संस्कृत दोनों भाषाओं को मिलाकर यह गाना बनाया था। उन्होंने भारत को एक देवी माँ के रूप में दिखाया, एक ऐसी ताकतवर छवि जो बाद में राष्ट्रवादी आंदोलन का केंद्र बन गई।
उन्होंने इस गाने को अपने मशहूर नॉवेल आनंदमठ में भी शामिल किया। यह नॉवेल 1770 के बंगाल के भयानक अकाल और नवाबों और ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ़ संन्यासी विद्रोह की पृष्टभूमि पर आधारित है।
डॉ. गुहा ने 1905 में वंदे मातरम के शुरू होने से लेकर 1950 में संविधान सभा द्वारा इसे भारत का राष्ट्रीय गीत बनाए जाने तक के सफर का ब्यौरा दिया है।
डॉ. सृष्टि गुहा ने आगे कहा, “इसने न केवल अपने समय के स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय पहचान और सामूहिक भावना का एक स्थायी प्रतीक बना हुआ है।”
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