ऑस्ट्रेलिया में माइग्रेशन की बहस में रेमिटेंस यानि पैसा बाहर भेजना, एक चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। लेकिन देश की अर्थव्यवस्था पर, और प्रवासियों और उनके परिवारों पर इसका असली असर क्या है?
मृणाल दत्त, जो चार साल पहले इंडिया से ऑस्ट्रेलिया आई थीं, नियमित तौर पर भारत में पैसे भेजती हैं — अक्सर एक बार में कुछ सौ डॉलर। उन्होंने SBS Examines को बताया कि भेजे गए पैसे उनके पार्टनर के माता-पिता के मेडिकल खर्चों के लिए होते हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि एक बच्चे के तौर पर यह आपकी ड्यूटी है कि आप उनके सभी मेडिकल प्रोसीजर में उनका साथ दें।"
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी में मनी और माइग्रेशन की सोशियोलॉजिस्ट प्रोफेसर सुप्रिया सिंह ने कहा कि कई कल्चर में पैसा देखभाल दिखाने का "सबसे ज़रूरी तरीकों में से एक" है।
अगर आप चीन से हैं, वियतनाम से हैं, मिडिल ईस्ट के किसी भी हिस्से से हैं, पैसिफिक से हैं; घर पैसे भेजना एक तरीका है जिससे आप अपने परिवार को बताते हैं कि आप उनके हैं, आप उनके बारे में सोचते हैं, आप उनकी परवाह करते हैं।Professor Supriya Singh
उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया में, जो लोग घर पैसे नहीं भेजते, वे अल्पसंख्यक हैं।"
"ऑस्ट्रेलिया में, और US और यूरोप में भी, एंग्लो-सेल्टिक कम्युनिटी में, वे अलग तरीके से केयर दिखाते हैं।"
विदेशों में रेमिटेंस के तौर पर कितना पैसा भेजा जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है। कुछ अनुमान हैं कि 2024 में यह $21 बिलियन से $38 बिलियन से अधिक हो सकता है, जिसमें भारत सबसे ज़्यादा पैसे पाने वाला देश होगा।
लेकिन ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर, रायन एडवर्ड्स का कहना है कि हमें इन नंबरों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "हम बाहर जा रहे पैसे को ठीक से माप नहीं पाते... असल में वे नंबर बहुत अपेक्षाकृत कम हैं।"
उन्होंने आगे कहा, अगर वे अंदाज़े सही भी होते, तो भी "यह हमारी इकॉनमी के एक प्रतिशत से भी कम होगें।"
इस हफ़्ते के एपिसोड में, SBS Examines में हम पता लगा रहे हैं कि रेमिटेंस ऑस्ट्रेलिया की इकॉनमी पर कैसे असर डालते हैं।
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