फ्रांस की रहने वालीं वैलेरेस वर्जिनी निकली तो थीं घूमने. लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जो शायद उनके जीवन का सबसे बड़ा अडवेंचर बन गया. वैलेरेस अपने पति और तीन बच्चों के साथ घूमने निकलीं. भारत में उन्होंने भ्रमण शुरू किया और फिर सड़क मार्ग से वह नेपाल के लिए चल दी. पूरा परिवार एक गाड़ी में सवार भारत के पूर्वी छोर से नेपाल बॉर्डर पर पहुंच गया.
खास बातेंः
- फ्रांसीसी परिवार भारत में घूमने के बाद नेपाल जाना चाहता था लेकिन लॉकडाउन में फंस गया.
- जब रहने की कोई जगह नहीं मिली तो उत्तर प्रदेश के एक गांव में उन्हें पनाह मिली.
- अब वे लोग गांव में इतना रच बस गए हैं कि कहीं जाना ही नहीं चाहते.
लेकिन किस्मत का खेल कुछ ऐसा हुआ कि कोरोना वायरस के संकट के कारण देश भर में लॉक डाउन की घोषणा कर दी गयी. वैलेरेस को नेपाल में प्रवेश नहीं मिला और वापस भेज दिया गया. अब न उनके पास जाने का कोई ठिकाना था और ना ही कोई जानने वाला. गाड़ी वापस हुई और नेपाल सीमा से सटे हुए उत्तर प्रदेश के जनपद महाराजगंज पहुंची. रात हो चुकी थी और जाने की कोई मंजिल नहीं थी. दूर एक जंगल में रात बितायी.
सुनें पूरी कहानी, उन्हीं की जबानी:
सुबह पास के गांव में किसी ने एक विदेशी परिवार को जंगल में देख लिया. धीरे धीरे बात फैली. लोगों ने घेर लिया. भय, आशंका, कौतुहुल, असमंजस सभी भाव एक साथ आ गये. एक दूसरे की भाषा भी नहीं समझ पा रहे थे. किसी तरह गांव के ही एक छात्र संजय भी वहां पहुंचे. संजय को इंग्लिश की जानकारी थी तो आपसी संवाद का एक चैनल खुला. फ्रांसिसी परिवार ने अपनी व्यथा बताई. संजय ने उनकी कहानी गांव वालों को बताई.
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भारत की अतिथि देवो भवः परंपरा का निर्वहन करते हुए गांव वालों ने उनसे अपने गांव चलने को कहा. पूरे परिवार को गांव के मंदिर के प्रांगण में सम्मान सहित रोका गया. उनका स्वागत किया गया. भोजन, दूध, फल की व्यवस्था की गयी. वैलेरेस का परिवार इस स्वागत से अभिभूत हो गया.
लेकिन बात अभी ख़त्म नहीं हुई. बात प्रशासन तक पहुंच गयी. अधिकारी और पुलिस भी वहां पहुंच गये. विदेशी लोगों और कोरोना वायरस का खौफ ही ऐसा था. परिवार की मेडिकल जांच हुई. पूरी तरह से संतोष करने के बाद अधिकारियों ने उनसे आग्रह किया कि उनके लिए किसी पांच सितारा होटल में रहने की सुविधापूर्वक व्यवस्था कर दी जाये. लेकिन वैलेरेस परिवार का दिल अब उसी गांव में और गांव वालों के प्यार में बस गया था. उन्होंने वहीँ गांव में रहने का फैसला किया.
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आज इनके परिवार को वहां रहते हुए एक महीना हो गया है. इनके खाने पीने दवाई आदि सभी चीज़ों की व्यवस्था गांव वाले करते हैं. आपस में बातचीत के लिए संजय मौजूद रहते हैं. वैलेरेस परिवार अब मंदिर में नियमित पूजा करता है, वृक्षारोपण एवं अन्य सामुदायिक कार्यों में हाथ बंटाता है.
समय समय पर प्रशासनिक अधिकारी इस परिवार से मिलकर उनका कुशलक्षेम लेते रहते हैं पर ये फ्रांसिसी परिवार अब उसी गांव में रच-बस सा गया है.
अब यह परिवार कोरोना संकट में फ्रांस नहीं जाना चाहता क्योंकि वहां पर इसका कहर बहुत अधिक है. फिलहाल पूरा परिवार महाराजगंज जिले के एक गांव में मस्त है और उम्मीद कर रहा है कि आगे भी सब कुशल रहेगा.
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