आज हम बात कर रहे हैं पर्सियन, यूरोपीय व भारतीय वास्तुशिल्प से निर्मित, अतीत और वर्तमान के संगम, लाल किले की !! खूबसूरत इमारतों को तामीर करने के शौक़ीन मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने जब अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली लाने का विचार बनाया तो पहले दिल्ली में रायसीना पहाड़ी और तालकटोरा को चुना गया लेकिन बादशाह के वास्तुकार उस्ताद हमीद व उस्ताद अहमद लाहौरी की सलाह पर सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए एक तरफ से यमुना की प्राकृतिक सुरक्षा लिए यमुना किनारे मैदानी भाग पर 12 मई 1639 में अष्टकोणीय ( octagonal) किला-ए-मुबारक अर्थात लाल किले का निर्माण, इज्जर खां की देखरेख में बुनियादी पत्थर रखे जाने के बाद शुरू हुआ जो लाल किला निर्माण में सबसे बड़े कारीगर उस्ताद अहमद वहामी के कौशल से 6 अप्रैल 1648 में पूर्ण हुआ.आलेख विजय जायरा, निर्माता और प्रस्तुतकर्ता कुमुद मिरानी
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