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मामे खानः ढोलक सीखना मैथ्स जैसा है, ये आ गया तो सब आ गया

Supplied by Mame Khan
Source: Supplied by Mame Khan

भारत में कुछ घराने ऐसे हैं जिनका जन्म ही मानो संगीत के लिए हुआ है. ऐसा ही एक घराना है राजस्थान में मांगणियार घराना। इसी घराने के हैं मामे खान.


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भारत में कुछ घराने ऐसे हैं जिनका जन्म ही मानो संगीत के लिए हुआ है. ऐसा ही एक घराना है राजस्थान में मांगणियार घराना। इसी घराने के हैं मामे खान.


प्राचीन काल से भारतीय संगीत समृद्ध रहा है. यहां का लोक संगीत, गायन शैली, विभिन्न वाद्य यंत्र, प्रतिष्ठित कलाकार और संगीतज्ञ विश्व भर में अद्वितीय हैं. भारत में कुछ घराने ऐसे हैं जिनका जन्म ही मानो संगीत के लिए हुआ है.  ऐसा ही एक घराना है राजस्थान में मांगणियार घराना। ये पीढ़ियों से संगीत साधना में लगे हैं.


खास-खास बातेंः

  • मामे खान भारत के सुप्रसिद्ध राजस्थानी लोक गायक हैं.
  • वह मांगणियार घराने से ताल्लुक रखते हैं और देश-विदेश में परफॉर्म करते हैं.
  • मामे खान ने बॉलिवुड की कई फिल्मों में गीतों को अपनी आवाज दी है.
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इस समुदाय के बच्चे के जैसे खून में ही संगीत होता है. बचपन से ही ये संगीत ही देखते, सुनते और गाते हैं. इनकी अपनी एक अलग गायन शैली होती हैं. मुख्यतः ये लोक गायन में सिद्धहस्त होते हैं. इनके समुदाय में मुख्यतः मुस्लिम होते हैं लेकिन इनकी संगीत पद्धति में राम, कृष्णा और शिव की वंदना है. भले ही इनका संरक्षण अब नहीं हो रहा है लेकिन फिर भी मांगणियार समुदाय के बच्चे आज भी बचपन से संगीत साधना में लीन रहते हैं. 

अब ज़रा बॉलीवुड की तरफ ध्यान करते हैं. आपने ‘लक बाय  चांस’ फिल्म में ‘बावरे...’ गाना सुना होगा. यह गाना राजस्थान के सत्तो गांव के कलाकार मामे खान ने गाया है. मामे भी मांगणियार समुदाय से ही हैं. एक छोटे से गांव से निकल कर मामे आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए हैं. मामे खान वह कलाकार हैं जिसने भारतीय लोक संगीत को अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पहुंचा दिया है. आज ये एक जाना पहचाना नाम है.

मामे खान की आवाज में सुनिए, उनकी कहानीः

लेकिन अभी भी मामे खान बॉलीवुड के पीछे नहीं भागते बल्कि अपनी संगीत साधना द्वारा देश और विदेश में परफॉरमेंस देते हैं. इनके शोज़ अमेरिका और यूरोप में धूम मचा चुके हैं. लोग भी अब के मांगणियार समुदाय को सम्मान देते हैं.

कौन हैं मामे खान?

मामे ने बहुत छोटी उम्र से ही गाना गाना शुरू कर दिया था. इंडिया गेट पर पहले ग्रुप के साथ बचपन में परफॉरमेंस दी थी. फिर ईला अरुण की बेटी की शादी में भी परफॉरमेंस के लिए गए थे. वहां इनको शंकर महादेवन ने सुना और रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया. तब मामे को कुछ मालूम नहीं था. उन्हें तो बस यही लगा था कि परफॉरमेंस देनी है और वह पहुंच गए अपनी पारंपरिक राजस्थानी वेषभूषा में. वहां पर लोगों को अचरज हुआ लेकिन उन्होंने वैसे ही गाना रिकॉर्ड किया और इनका सफर बॉलीवुड में भी चल निकला.

आज मामे खान कई फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग कर चुके हैं. अपनी अद्भुत शैली उन्होंने लोक संगीत से युवाओं को  जोड़ दिया है.

मामे अपनी परफॉरमेंस एक कहानी सुनाते हैं. यह कहानी प्रेमी प्रेमिका की होती है या सूफी की. इसी क्रम में उन्होंने प्रवासी भारतीयों के लिए काफी भावपूर्ण गाना गया है  जिसमें ये अपने देश से  दूर भारतीयों का दर्द सामने लाते हैं.

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इनको इनके पिता जी ने सीधे गाने का मौका दे दिया हो. पहले कई साल इनसे सिर्फ ढोलक बजवाई गयी. वह कहते हैं कि ढोलक बजाना मैथ्स की तरह है, अगर ये आ गया तो सब आ गया.

मामे खान को अपनी विशिष्ट लोक गायन शैली के लिए वर्ष 2016 का ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है. इनके कई एल्बम जैसे डेज़र्ट सेशंस, समर नाईट इन द ड्यून्स आ चुके हैं. सफर मुश्किल है लेकिन फिर भी मामे खान अपने समुदाय की विशिष्ट पहचान लिए हुए आगे बढ़ रहे हैं.

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