कृष्ण मोहिनी, तीसरे लिंग की एक कलाकार, भारतीय ट्रेनों में लंबे समय से चले आ रहे रूढ़िगत व्यवहार को बदल रही हैं। भीख मांगने की परंपरा से दूर, वह यात्रियों के सामने नृत्य प्रस्तुत करती हैं और स्पष्ट कहती हैं कि वह कला के सम्मान के लिए आई हैं, न कि ताली या भीख के लिए। उनकी पहल से यात्रियों का नजरिया बदला है। लोग स्वेच्छा से उनकी मदद भी करते हैं। वे कहती हैं कि अब ताली सम्मान की है, न कि मजबूरी की।
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