राजस्थान के बाड़मेर ज़िले में ऐसे बच्चे, जो कभी मज़दूरी करते थे, मंदिरों के पास पेड़ों के नीचे रहते थे या स्कूल छोड़ने को मजबूर थे, आज सरकारी नौकरियों और देश के शीर्ष मेडिकल संस्थानों तक पहुंच रहे हैं। यह बदलाव संभव हुआ है डॉ भरत सारण की पहल से, जिन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर और अनाथ बच्चों के लिए निःशुल्क आवासीय शिक्षा की व्यवस्था की। यह कहानी शिक्षा के ज़रिये बदलती ज़िंदगियों की है।
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