Key Points
- पहला बेड़ा 26 जनवरी को नहीं, बल्कि 18 जनवरी 1788 को बॉटनी बे पहुंचा था।
- ऑस्ट्रेलिया की औपचारिक स्थापना 26 जनवरी को नहीं, बल्कि 7 फरवरी 1788 को हुई थी।
- 26 जनवरी लंबे समय से फर्स्ट नेशन्स के लोगों के लिए विरोध जताने और सच को बताने की तारीख रही है।
यह लेख, SBS में नेशनल इंडिजिनस अफेयर्स एडिटर और NITV पर 'द पॉइंट' The Point के सह-होस्ट जॉन-पॉल जैन्के द्वारा दिखाए गए NITV वीडियो पर आधारित है। उन्होंने बताया है कि 26 जनवरी ऑस्ट्रेलिया डे कैसे बना और क्यों देश भर के लोगों के लिए इसका मतलब आज भी बहुत अलग है।
- 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया में क्या हुआ था?
- क्या पहला बेड़ा 26 जनवरी को पहुंचा था?
- आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रेलिया की स्थापना कब हुई थी?
- फर्स्ट नेशंस पर लैंडिंग का क्या असर हुआ?
- 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया दिवस क्यों बनाया गया?
- क्या ऑस्ट्रेलिया दिवस फेडरेशन का प्रतीक है?
- ऑस्ट्रेलिया दिवस के नाम को कब से प्रयोग किया जाने लगा?
- फर्स्ट नेशन्स के लोगों के लिए 26 जनवरी शोक का दिन क्यों है?
- 26 जनवरी कब से राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश बन गया?
- 26 जनवरी आज भी क्यों मायने रखता है?
26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया में क्या हुआ था?
26 जनवरी 1788 का वह दिन है जब कैप्टन आर्थर फिलिप ने इंग्लैंड छोड़ने के आठ महीने से ज़्यादा समय बाद, सिडनी कोव में ब्रिटिश झंडा फहराया था। उस शाम तक, ग्यारह जहाजों का पूरा फर्स्ट फ्लीट पोर्ट जैक्सन में लंगर डाल चुका था।
हालांकि इस पल को अक्सर देश की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है, लेकिन यह न तो ब्रिटिश आने की शुरुआत थी और न ही ब्रिटिश कॉलोनी की औपचारिक स्थापना।

क्या पहला बेड़ा 26 जनवरी को पहुंचा था?
नहीं। पहला फ्लीट 18 जनवरी 1788 को बॉटनी बे पर पहुंचना शुरू हुआ। क्षेत्र का जायजा लेने के बाद, फिलिप ने तय किया कि खराब मिट्टी और ताजे पानी की कमी की वजह से यह जगह बसने के लिए सही नहीं है।
तेज हवाओं की वजह से फ्लीट के निकलने में देर हो गई, और 25 जनवरी को कैप्टन जीन-फ्रेंकोस् डी ला पेरूस् के नेतृत्व में दो फ्रेंच जहाज किनारे पर दिखाई दिए। अगली सुबह, फिलिप और एक छोटा सा ग्रुप सिडनी कोव चले गए, जहां 26 जनवरी को एक छोटा सा समारोह हुआ।
आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रेलिया की स्थापना कब हुई थी?
न्यू साउथ वेल्स की कॉलोनी को आधिकारिक तौर पर 7 फरवरी 1788 को घोषित किया गया, जब आर्थर फिलिप के गवर्नर बनने की औपचारिक घोषणा की गई।
कॉलोनी की सीमाएं 135वीं मेरिडियन से पूरब तक फैली हुई थीं, जो महाद्वीप के आधे से ज़्यादा हिस्से को बनाती थीं। ये सीमाएं यूरोपियन ट्रीटी पर आधारित थीं, इस बात के बावजूद कि यह ज़मीन पहले से ही फर्स्ट नेशन्स के लोगों का घर थी।

फर्स्ट नेशंस पर लैंडिंग का क्या असर हुआ?
पहला बेड़ा सिडनी बेसिन में कम से कम 29 फर्स्ट नेशंस के कबीले ग्रुपस् वाले देश में पहुंचा।
ज़मीन खाली नहीं थी।
फर्स्ट नेशंस के लोगों के लिए, 26 जनवरी बेदखली, हिंसा और विरोध की शुरुआत का दिन है। उसका असर आज भी महसूस किए जाता है।
26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया दिवस क्यों बनाया गया?
26 जनवरी को पहली बार 1818 में गवर्नर लॉकलन मैक्वेरी ने न्यू साउथ वेल्स में सरकारी अवकाश के तौर पर जारी किया था। तब इसे फर्स्ट लैंडिंग डे या फ़ाउंडेशन डे के नाम से जाना जाता था।
1888 तक, ज़्यादातर कॉलोनियाँ 26 जनवरी को फ़ाउंडेशन डे या एनिवर्सरी डे के तौर पर मना रही थीं, हालाँकि हर कॉलोनी की स्थापना की तारीखें अलग-अलग थीं।
उन्नीसवीं सदी के आखिर में, ऑस्ट्रेलियन नेटिव्स एसोसिएशन 26 जनवरी को नेशनल हॉलिडे का ज़ोरदार सपोर्टर बन गया। इस संगठन ने फ़ेडरेशन को बढ़ावा दिया लेकिन सदस्यता केवल ऑस्ट्रेलिया में जन्मे गोरे पुरुषों तक ही सीमित रखी।
क्या ऑस्ट्रेलिया दिवस फेडरेशन का प्रतीक है?
नहीं। कॉमनवेल्थ ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया 1901 में नए साल के दिन बना था। फ़ेडरल पार्लियामेंट की पहली मीटिंग बाद में, 9 मई 1901 को हुई थी।
26 जनवरी इनमें से किसी भी घटना को नहीं दिखाता है। इसके बजाय, यह 1788 में सिडनी कोव में लैंडिंग की याद में मनाया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया दिवस के नाम को कब से प्रयोग किया जाने लगा?
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, युद्ध के लिए फंड इकट्ठा करने की कोशिशों के तहत नेशनल ऑस्ट्रेलिया डे का विचार आया। कई सालों तक, ऐसे इवेंट्स जनवरी के बजाय जुलाई में होते थे।
1918 तक, कुछ संगठन 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया डे कहने लगे थे। 1930 में, ऑस्ट्रेलियन नेटिव्स एसोसिएशन ने औपचारिक रूप से इस नाम को अपना लिया, और 1935 तक ज़्यादातर राज्यों ने इसका अनुसरण किया, न्यू साउथ वेल्स ने इसे कई और सालों तक एनिवर्सरी डे कहना जारी रखा।
फर्स्ट नेशन्स के लोगों के लिए 26 जनवरी शोक का दिन क्यों है?
1938 में लैंडिंग की 150वीं सालगिरह पर, फर्स्ट नेशंस के नेताओं ने शोक दिवस मनाया। यह राष्ट्रीय आदिवासी नागरिक अधिकारों के शुरुआती विरोध प्रदर्शनों में से एक था, जिसने अन्याय, बहिष्कार और बेदखली की ओर ध्यान खींचा।
तब से, 26 जनवरी कई फर्स्ट नेशंस समुदायों के लिए विरोध, याद और सरवाइवल का एक महत्वपूर्ण दिन बना हुआ है।
26 जनवरी कब से राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश बन गया?
दशकों तक अलग-अलग राज्यों में पब्लिक हॉलिडे का स्वरूप अलग-अलग रहा। कुछ राज्य 26 जनवरी को ही छुट्टी मनाते थे, जबकि दूसरे इस दिन के सबसे पास आते सोमवार को छुट्टी मनाते थे।
1988 की दो सौवीं सालगिरह के बाद, सभी राज्यों ने धीरे-धीरे अपनी पब्लिक हॉलिडे को एक जैसा कर दिया।
1994 में 26 जनवरी का दिन पूरे देश में एक जैसा सार्वजनिक अवकाश बन गया।

26 जनवरी आज भी क्यों मायने रखता है?
26 जनवरी के कई मतलब हैं। कुछ लोगों के लिए, यह राष्ट्रीय पहचान और जश्न का प्रतीक है। कई फर्स्ट नेशन्स के लोगों के लिए, यह हमले, नुकसान और उनकी मज़बूती का प्रतीक है।
जैसे-जैसे ऑस्ट्रेलिया में इस विषय पर चर्चा जारी है। सच बताने और ज़्यादा जानकारी वाला और सबको साथ लेकर चलने वाला भविष्य बनाने के लिए इस तारीख के पूरे इतिहास को समझना बहुत ज़रूरी है।
ऑस्ट्रेलिया एक्सप्लेंड का यह अंश NITV के साथ मिलकर बनाया गया है। जॉन-पॉल जैन्के का ऑडियो NITV के वीडियो एक्सप्लेनर से लिया गया है।
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