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...तो कौन जीत रहा है गुजरात में?

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Supporters of India's ruling Bharatiya Janata Party(BJP) leave after an election campaign rally at Surendranagar in Gujarat, India. Source: AAP Image/AP Photo/Ajit Solanki

पिछले दो दशक में शायद पहली बार है जब यह सवाल पूछा जा रहा है. 2002 के बाद गुजरात में लगातार एक ही जैसा राजनीतिक माहौल रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी के राज्य को छोड़कर केंद्र की राजनीति में जाने के बाद से माहौल लगातार बदलता रहा है. तीन साल में दो मुख्यमंत्री बदले गए और अब खबरें ऐसी छप रही हैं कि खुद नरेंद्र मोदी की रैलियों में कुर्सियां खाली हैं.


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By Vivek Asri

Source: SBS


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पिछले दो दशक में शायद पहली बार है जब यह सवाल पूछा जा रहा है. 2002 के बाद गुजरात में लगातार एक ही जैसा राजनीतिक माहौल रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी के राज्य को छोड़कर केंद्र की राजनीति में जाने के बाद से माहौल लगातार बदलता रहा है. तीन साल में दो मुख्यमंत्री बदले गए और अब खबरें ऐसी छप रही हैं कि खुद नरेंद्र मोदी की रैलियों में कुर्सियां खाली हैं.


गुजरात के दौरे पर निकले नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नाथ कहते हैं कि बेशक माहौल पहले से अलग है. वह बताते हैं, “अभी यह कहना बहुत मुश्किल है कि कौन जीतेगा, हारेगा. लेकिन सालों के बाद गुजरात के लोग कह रहे हैं कि इस बार कुछ बराबरी का चुनाव देख रहे हैं. लोग बताते हैं कि पिछले तीन-चार चुनाव में तो ऐसा होता था कि परीक्षा से पहले रिजल्ट आ जाता था. ऐसी स्थिति इस बार नहीं है. इस बार परीक्षा भी होगी, लोगों को रिजल्ट का इंतजार भी रहेंगा.”

दरअसल, इस बार गुजरात में बहुत कुछ अलग हुआ है. पटेल आंदोलन के बाद हार्दिक पटेल जैसे युवा नेता के उदय से लेकर नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी लागू होने के कारण व्यापारियों में उपजे गुस्से ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से उसका विशेष स्थान छीन लिया है और वह संघर्ष करती दिख रही है. गुजरात घूम रहे पत्रकार राजन प्रकाश कहते हैं, “जिस गुजरात मॉडल की बात करके नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने हैं, उनके राज्य की स्थिति ये बता रही है कि अगर वे कंफर्टेबल होते तो उस मॉडल की बात करते ना कि सर्जिकल स्ट्राइक और वर्ल्ड फोरम पर अपने कामों की.”

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An Indian man waves a flag of India's main opposition Congress party during Vice President Rahul Gandhi's visit to the Dalit Shakti Kendra Source: AAP Image/AP Photo/Ajit Solanki

तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी के लिए सबसे आसान जगह इतनी मुश्किल बन गई है. नरेंद्र नाथ बताते हैं, “2014 तक वहां सब ठीक जा रहा था. 2012 में मोदी का राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण हुआ था, उस आधार पर उन्होंने बड़ी जीत हासिल की. 2014 में तो वह खुद पीएम उम्मीदवार थे और उन्हें भारी वोट मिला. लेकिन उसके बाद देखिए. गुजरात में बीजेपी के लिए एक भी अच्छी सूचना नहीं आई. पटेल आंदोलन हुआ. दलित आंदोलन हुआ. ओबीसी नाराज हुआ. जीएसटी आया जो बीजेपी को कोर वोटर को नाराज कर गया. नोटबंदी का सकारात्मक असर नहीं हुआ. किसान समस्या पहली बार इस तरह सामने आ रही है. बेरोजगारी खबरों में है. तो एक भी पॉजीटिव बात सामने नहीं आई.”

और यह वजह है कि सवाल पूछा जा रहा है, गुजरात में कौन जीता रहा है. हमारे दोनों विशेषज्ञ पत्रकार एक ही तरफ इशारा करते हैं. राजन प्रकाश कहते हैं, “दो-तीन चीजें अगर होती हैं. चीन से बने उत्पादों के बारे में सरकार कोई ऐलान कर दे, अगर सरकार टैक्स कम करने की नई घोषणा कर देती है तो मैं तो यही कहूंगा कि बीजेपी जीत रही है.”

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India's main opposition Congress party Vice President Rahul Gandhi waves at the crowd as he speaks during an election campaign rally Source: AAP Image/AP Photo/Ajit Solanki

बेशक चुनावों को लेकर भविष्यवाणी करना असंभव है लेकिन नरेंद्र नाथ भी एक इशारा तो करते हैं. वह कहते हैं, “अगर इस बार भी ये जीत रहे हैं या जीतने की स्थिति में हैं तो ये कहीं ना कहीं कांग्रेस का अंदर से कमजोर हो चुका ढांचा है, वो भी जिम्मेदार है क्योंकि अगर वहां एक मजबूत विपक्ष होता तो इनके जीतने के चांस लगभग नहीं के बराबर होते.”

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