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क्या आप इंग्लिश जानते हैं? FB पर इस एक पोस्ट ने बदल दी हजारों जिंदगियां

Aarti Madhusudan
आरती मधुसूदन Source: Supplied

कभी कभी एक छोटी सी पहल बहुत से लोगों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव ला देती है। चेन्नई की आरती मधुसूदन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।


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Source: SBS



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कभी कभी एक छोटी सी पहल बहुत से लोगों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव ला देती है। चेन्नई की आरती मधुसूदन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।


कोरोना महामारी के दौर में आरती ने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट डालीः ‘English Theriyuma?’  यानी, क्या आप इंग्लिश जानते हैं? 


खास बातेंः

  • गरीब बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के मकसद से चेन्नै की आरती ने यह शुरुआत की है.
  • उनके साथ देश-विदेश के करीब डेढ़ हजार वॉलंटियर जुड़े हैं.
  • फोन पर एक घंटा बात करने से बच्चों की झिझक दूर हो रही है.

असल में आरती कुछ ऐसे वॉलंटियर्स की तलाश में थीं जो स्कूल के बच्चों से इंग्लिश में बातचीत करके उनके दिल में इंग्लिश के प्रति मौजूद डर को समाप्त कर सके ।

उनके संपर्क में बहुत से ऐसे बच्चे थे जो इंग्लिश नहीं जानते थे। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि ऐसी नहीं थी जिससे वे अंग्रेजी की ट्यूशन ले सकें या किसी नामी गिरामी इंग्लिश माध्यम के स्कूल में पढ़ सकें।

Hiiii so happy to see how the Let's Teach English initiative is growing . Amazing volunteers :-). Do take a look at... Posted by Aarti Madhusudan on Sunday, 30 August 2020

आरती को बस 10-20 ऐसे लोग चाहिए थे जो अपनी बिजी दिनचर्या से हफ्ते में एक घंटा निकाल सकें और ऐसे बच्चों से फ़ोन से बात कर सकें, उनसे इंग्लिश में बोलचाल कर सकें, उनकी इंग्लिश के प्रति झिझक निकाल सकें।

आरती ने सोचा न था कि उनकी छोटी सी पहल इतनी दूर तक जाएगी। सैकड़ों लोग उस फेसबुक पोस्ट के कारण उनके संपर्क में आ गए। भारत ही नहीं, अमेरिका, दुबई और अन्य देशों से भी लोगों ने संपर्क किया। लोग जुड़ते गए और आज ये कारवां डेढ़ हज़ार से ऊपर पहुंच गया है।

सबसे अच्छी बात है कि इसमें कहीं पर किसी को कुछ भी नहीं देना, कोई फीस नहीं, कोई चार्ज नहीं, सब कुछ फ्री है।

आरती मधुसूदन बताती हैं कि तरीका बेहद सादा है।

वह कहती हैं, "हमारे पास स्थानीय स्कूलों का आंकड़ा है जहां बच्चे इंग्लिश नहीं जानते। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। ऐसे बच्चों को एक वॉलंटियर हफ्ते में एक घंटा फोन करता है और इंग्लिश में बातचीत करता है। धीरे धीरे से बच्चे की झिझक ख़त्म होती है और वह सामान्य बात करता है।"

इसमें कोई सिलेबस या विषय तय नहीं हैं बल्कि बातचीत आम भाषा में होती है जिससे बच्चे को इंग्लिश की व्यावहारिक समझ आ जाती है।

नेहा अमेरिका के सिएटल शहर में रहती हैं। सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। खाना बनाना और हाईकिंग उनके शौक है। इस पहल में वह भी वॉलंटियर कर रही हैं। नेहा ने इस प्रोजेक्ट की विस्तृत सामग्री तैयार की है। वह कहती हैं कि अब इसे और आगे ले जाना है।

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