Key Points
- रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना है जिसके दौरान स्वस्थ वयस्क मुसलमान सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं।
- ईद उल-फितर उपवास के पवित्र महीने के अंत पर तीन दिवसीय उत्सव है।
- मुस्लिम ऑस्ट्रेलियाई अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं के साथ ईद का उत्सव मनाते हैं
ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक देश है जहां मुस्लिम समुदाय जनसँख्या का एक अहम हिस्सा है। अगर आप किसी बड़े शर या कसबे में रहते हैं, तो बहुत मुमकिन है की आपके मित्रों या साथियों में कई मुस्लिम व्यक्ति होंगे। एक समावेशी बहुसांस्कृतिक समाज की सबसे बड़ी निशानी यही है कि वहां एक दूसरे के धर्म और संस्कृति को समझा भी जाता है और सराहा भी जाता है।
रमादान या रमज़ान इस्लामिक चंद्र पंचांग का नौवां महीना है जिसमें स्वस्थ्य मुस्लिम वयस्क सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं, जिन्हें रोज़ा कहा जाता है।
रमादान का महीना ऑस्ट्रेलिया और दुनिया भर के इस्लामिक व्यक्तियों के लिए प्रार्थना और उपवास का पवित्र समय है। यह इस्लामिक आस्था और संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है।

तो रमजान क्या है ?
रमजान इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसके दौरान स्वस्थ वयस्क मुसलमानों को सुबह से शाम तक उपवास करना पड़ता है।
प्रोफेसर ज़ुलेहा केस्किन मेलबर्न में चार्ल्स स्टुअर्ट विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन और सिविलाइजेशन सेंटर की एसोसिएट प्रमुख हैं।
वह कहती हैं, रमजान का महीना मुसलमानों के लिए एक बड़ी सीख या विकास और अनुशासन प्रक्रिया का समय होता है।
रमजान को मुसलमानों के लिए साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है और यह इसे एक बहुत ही खास महीना बनाता है।एसोसिएट प्रोफेसर ज़ुलेहा केस्किन. एसोसिएट हेड - सेंटर फॉर इस्लामिक स्टडीज् एंड सिविलाइजेशन चार्लस् स्टुअर्ट यूनिवर्सिटी, मेलबर्न
इस्लामी कैलेंडर, जिसे हिजरी कैलेंडर भी कहा जाता है, पृथ्वी के चारों ओर घूमते चंद्रमा के चक्र पर आधारित है। चूँकि यह सौर वर्ष से 10 से 12 दिन छोटा होता है, इसलिये इस्लामी त्योहारों, अवसरों की तारीखें हर साल बदलती रहती हैं।
इसका अर्थ यह है कि रमज़ान हर साल अलग अलग तारीखों पर आता है।

मुसलमानों को उपवास क्यों करना होता है?
उपवास इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है । यह है- आस्था, प्रार्थना, दान, उपवास और हज या तीर्थयात्रा ।
विशेष रूप से उपवास के दौरान, मुसलमानों को धूम्रपान, यौन संबंध बनाने, क्रोध व्यक्त करने या बहस में शामिल होने और अनैतिक कार्य करने पर रोक लगाने की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा, अतिरिक्त पूजा पद्धतियों, जैसे कि प्रार्थना, कुरान को पढ़ना और समझना और दान कार्य को प्रोत्साहित किया जाता है। कई मुसलमान रोज़ा, या इफ्तार तोड़ने के बाद मस्जिदों में भी जाते हैं।
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर अरब एंड इस्लामिक स्टडीज की निदेशक, प्रोफेसर करीमा लाशीर का कहना है कि रमजान में खाने या पीने से परहेज करने से अलावा भी बहुत कुछ है।
प्रोफेसर लाशीर बताती हैं, "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आध्यात्मिकता का महीना है, यह एक ऐसा महीना है जो अपनी आस्था, ईश्वर के साथ फिर से जुड़ने के लिए समर्पित है।"
यह एक ऐसा महीना है जहां हम दयालु इंसान बनना फिर से सीखते हैं, उन लोगों की जरूरतों को समझते हैं जो गरीब हैं, जो खाने का खर्च नहीं उठा सकते हैं और हम अपने आसपास की दुनिया से फिर से जुड़ते हैं।प्रोफेसर करीमा लाशीर, सेंटर फॉर अरब एंड इस्लामिक स्टडीज, एएनयू
प्रार्थना का एक रूप और एक धार्मिक कर्तव्य होने के अलावा, प्रोफेसर लाशीर का कहना है कि उपवास के स्वास्थ्य लाभ भी हैं।
"शारीरिक रूप से, यह बहुत अच्छा है क्योंकि यह शरीर के पाचन को नियंत्रित करता है, यह शरीर में किसी भी विषाक्तता को शुद्ध करता है। इसलिए, यह एक बहुत ही स्वस्थ प्रक्रिया साबित हुई है और हम इंटरमिटेंट फास्टिंग के बारे में जानते हैं और यह जानते हैं कि यह शरीर के लिए कैसे महत्वपूर्ण है।

ईद क्या है?
मुसलमानों के पूरे एक महीने के उपवास के बाद ईद आती है।
ईद 'त्योहार' या 'दावत' के लिए एक अरबी शब्द है और इस्लामी कैलेंडर में दो मुख्य ईद हैं: ईद उल-फितर और ईद उल-अधा।
ईद उल-फितर, जिसे 'छोटी ईद' भी कहा जाता है, तीन दिवसीय उत्सव है जो रमजान या उपवास के महीने के अंत का प्रतीक है।
ईद-उल-फितर रमजान के महीने के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों को मनाने का अवसर है।Dr Zuleyha Keskin, Centre for Islamic Studies and Civilisation, Charles Stuart University
और जब ईद आती है तो मुसलमान दान देने के लिए भी बाध्य होते हैं, जिसे ज़कात अल-फितर के रूप में जाना जाता है, ताकि गरीब भी जश्न मना सकते हैं।
प्रोफेसर लाशीर कहती हैं, ईद उल-फितर "एकजुटता और क्षमा" का उत्सव है क्योंकि यह सामुदायिक भावना को फिर से जीवंत करता है और मुसलमानों को क्षमा मांगने के लिए प्रोत्साहित करता है।
इसके अलावा, यह बच्चों को मस्ती करने, नए दोस्त बनाने और संस्कृति से परिचित होने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।

नए कपड़े खरीदना, विशेष रूप से बच्चों के लिए, घरों की सफाई करना और विशेष मिठाइयाँ और व्यंजन तैयार करना ईद की तैयारी का एक बड़ा हिस्सा है।
ईद उल-अधा, जिसे 'बलिदान की ईद' या 'ग्रेटर ईद' के रूप में भी जाना जाता है, यह वार्षिक हज यात्रा के बाद आता है। इसमें इब्राहीम की इच्छा का जश्न मनाया जाता है जिसने अपने बेटे इश्माएल को बलिदान करने के लिए ईश्वर की आज्ञा का पालन किया था।

मुस्लिम ऑस्ट्रेलियाई ईद कैसे मनाते हैं?
ईद का उत्सव सवेरे की प्रार्थना के साथ शुरू होता है। अधिकांश इस्लामिक देशों में ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अदहा के दिन सार्वजानिक छुट्टी होती है।
स्थानीय मस्जिदों और सामुदायिक केंद्रों में सांप्रदायिक प्रार्थनाएँ आयोजित की जाती हैं जहाँ लोग एक दूसरे को 'ईद मुबारक' कहते हैं, जिसका अर्थ है 'हैप्पी ईद'।
परिवार और दोस्त भी एक-दूसरे से मिलते हैं और ईद के दौरान सामुदायिक सभाएं आम हैं।
प्रोफेसर लाशीर आगे कहती हैं, "यह एक पारिवारिक सामूहिक उत्सव है जहां हर कोई हर किसी से मिलने जाता है, और भोज और भोजन, विशेष केक और व्यंजनों के साथ ईद-उल-फितर उत्सव के तीन दिनों में शामिल होते हैं।"
हालाँकि, मुस्लिम ऑस्ट्रेलियाई कई देशों से विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं से आते हैं और उनके उत्सव भी अलग-अलग तरह के होते हैं।

अली अवान पाकिस्तानी पृष्ठभूमि के एक ऑस्ट्रेलियाई हैं जो हर साल ईद-उल-फितर के दौरान विशेष रूप से व्यस्त रहते है। वह ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े बहुसांस्कृतिक ईद त्योहारों में से एक का आयोजन करते है।
उनका कहना है कि विभिन्न पृष्ठभूमि के मुसलमानों के बीच "बहुत बड़ा" सांस्कृतिक अंतर हैं। ऑस्ट्रेलियाई बहुसांस्कृतिक ईद महोत्सव के अध्यक्ष के रूप में उनका काम उन सभी को एक साथ एक स्थान पर लाना है।
“कुछ लोग अलग-अलग तरह का खाना पकाते हैं, और उनके पास अलग-अलग कपड़े होते हैं जो वे ईद के दिन पहनते हैं। और फिर, जब उत्सव की बात आती है, तो इसमें कुछ गतिविधियाँ, कुछ प्रदर्शनियाँ, मनाने के नये नये कुछ तरीके और भी कई चीजें हो सकती है," श्री अवान बताते हैं।
ईद के त्यौहार के दौरान, हम सभी विभिन्न प्रदर्शनों, विभिन्न संस्कृतियों को एक साथ एक जगह लाने की कोशिश करते हैं और यही ऑस्ट्रेलिया की सुंदरता है, खास बात है।अली अवान, ऑस्ट्रेलियन बहुसांस्कृतिक ईद महोत्सव
प्रोफ़ेसर लाशीर इस बात से सहमत हैं कि ऑस्ट्रेलिया में ईद का जश्न कई इस्लामी देशों की तुलना में कहीं अधिक विविध है।
"ऑस्ट्रेलिया में मुस्लिम समुदाय के बारे में अच्छी बात यह है कि अधिकांश उत्सव सामुदायिक केंद्रों और स्थानीय मस्जिदों में होते हैं, जो इन सभी अलग-अलग पृष्ठभूमि के समुदायों को एक साथ लाते हैं," वह कहती हैं।
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