Key Points
- प्रवासी दु:ख जटिल और बहुआयामी है।
- जब कुछ खोने की भावनाएं अमूर्त होती हैं तो उन्हें संभालना अधिक कठिन हो जाता है।
- लंबे समय तक चलते दुःख के कारण महत्वपूर्ण निर्णय लेने में देरी हो सकती है और जीवन में स्थिरता आने में बाधा आ सकती है।
- हीलिंग जटिल और एक व्यक्तिगत प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन सपोर्ट उपलब्ध है।
प्रवास के सन्दर्भ में दुःख बहुस्तरीय है।
भौगोलिक अलगाव, परिचितता और सपोर्ट नेटवर्क का न होना, सो लेकर जुड़ने की भावना की कमी से, नए प्रवासी अक्सर एक साथ कई तरह से खोयापन महसूस करते हैं।
शुरुवात के सांस्कृतिक झटके और घर की याद यानि होमसिकनेस, या भाषा की बाधाओं से कठिनाइयों के अलावा, कई प्रवासियों और शरणार्थियों को मूर्त और अमूर्त हानियों का ऐसा अनुभव होता है जो उनके संभाल और रिश्तों को अन्दर तक नष्ट कर सकता है।
इस तरह के अहसास को अक्सर प्रवास से जुड़ा दुःख कहा जाता है।
बियॉन्ड ब्लू के क्लिनिकल लीड डॉ ग्रांट ब्लाशकी का कहना हैं,
"जब कोई दुखग्रस्त होता है, और उन्हें किसी प्रकार का खोयापन लगता है, तो आमतौर पर यह पहचाना जा सकता है। आपने किसी प्रियजन या पालतू जानवर को खो दिया है, या आपने नौकरी खो दी है, या आपने अपना घर खो दिया है, यह पता चलता है, और आप दुखी हैं और आप गुस्से में हैं और आप परेशान हैं, लेकिन यह समय के साथ चला जाता है।"
लेकिन प्रवासी दूसरी तरह के भी भावात्मक रूप से खोनेपन को महसूस करते हैं जो स्पष्ट नहीं हैं या जिन्हें शब्दों में बता पाना मुश्किल होता है, उसे ‘अस्पष्ट नुकसान‘
कहते हैं।
“अस्पष्ट नुकसान तब होता है जब नुकसान के बारे में कुछ हद तक स्पष्टता की कमी होती है, इसलिए उस दुःख को प्रबंधित करना और चीजों के संदर्भ में सामान्य हो पाना बहुत कठिन होता है", डॉ ग्रांट ब्लाशकी बताते हैं।
[प्रवासियों] को लग सकता है कि उनकी पहचान बदल गई है। वे महसूस कर सकते हैं कि उनकी सामाजिक स्थिति में गिरावट आई है ... औपचारिक भाषा से लेकर रोज़मर्रा के मज़ाक को समझने तक के लिये उनके सामने बातचीत करने की चुनौती भी है।Dr Grant Blashki, Beyond Blue Clinical Lead

यूरोग्वाय में जन्मे क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जॉर्ज अरोचे एनएसडब्ल्यू सर्विस फॉर द ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ टॉर्चर एंड ट्रॉमा सर्वाइवर्स (STARTTS) के सीईओ हैं। उनका मानना है कि प्रवासी दुःख अक्सर तथ्यात्मक और निर्विवाद खोनेपन दोनों के संयोजन से उत्पन्न होता है,
“हम अपने दोस्तों, अपने रिश्तेदारों, जिन लोगों से हम प्यार करते हैं, जिन जगहों से हम प्यार करते हैं, उनके बारे में दुखी हो सकते हैं। और यह उन चीजों के बारे में दु: ख है जो हम पीछे छोड़ गए हैं और अब हमारे पास नहीं है।"

"लेकिन प्रवासी दु:ख उन चीजों से भी संबंधित है जो कम मूर्त हैं, जैसे कि अपनी पहचान और आपके स्टेटस में बदलाव जो एक औपचारिक सेटिंग में, आप अपने देश में थे, और अनौपचारिक स्थिति में भी जो आपके सोशल नेटवर्क में हो।"
श्री आरोचे कहते हैं, कुछ मामलों में, प्रवासी दु:ख इस बात से बी है कि क्या कुछ सम्भव हो सकता था ।
प्रवासी दुःख आपके भ्रम या कल्पनाओं के बारे में है कि आप क्या हासिल कर सकते थे या क्या कर सकते थे यदि आप घर (अपने देश में) पर ही रहते।Jorge Aroche, Clinical Psychologist and STARTTS CEO.
उनका कहना है कि एक और मुद्दा जो उत्पन्न हो सकता है, विशेष रूप से आर्थिक प्रवासियों या शरणार्थियों के बीच, कि अपनी उपलब्धि के समय उदासी महसूस करना, या एक अपराध बोध के कारण खुले तौर पर अपने दुख को व्यक्त करने में असमर्थ होना।
[आर्थिक प्रवासियों और शरणार्थियों] शिकायत करने के लिए दोषी महसूस कर सकते हैं ... जब रिश्तेदार, प्रियजन अभी भी मूल देश में हैं, बहुत खराब, अक्सर खतरनाक स्थितियों से निपट रहे हैं," श्री अरोचे बताते हैं।
हालांकि, वह चेतावनी देते हैं कि प्रवासियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने दुख को स्वीकार करें और व्यक्त करें, ताकि वे इस पर काम कर सकें।

इससे कैसै जूझना है
भारत में जन्मे आर-यू-ओके के अध्यक्ष कमल शर्मा रेजिलम के सीईओ हैं, जो एक कंसल्टेंसी फर्म है जो रणनीतिक नेतृत्व और लचीलापन प्रशिक्षण प्रदान करती है। उनका कहना है कि जब वह पहली बार ऑस्ट्रेलिया पहुंचे तो उन्हें यह समझने में परेशानी हुई कि वह कहां फिट होते हैं।
समय के साथ, उन्होंने सीखा विस्थापन की भावनाओं का सामना कैसे करना है। उन्होंने स्वीकारा कि उनकी अपनी पहचान बदल चुकी है।
हालाँकि श्री शर्मा मानते हैं कि आपकी समान पृष्ठभूमि के लोगों के साथ घुलना-मिलना, या वो सांस्कृतिक स्थानों के मनोरंजन नए प्रवासियों को आराम और निश्चितता प्रदान कर सकते है, उनका यह भी मानना है कि नए लोगों और नये अनुभवों के लिए आगे आना , उन्हें आत्मसार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वह कहते हैं, "मुझे लगता है कि सकारात्मक रूप से जूझने के तंत्र हैं, और नकारात्मक प्रतिलिपि तंत्र हैं।
सकारात्मक तंत्र इस नए वातावरण में खुद को तलाशने के बारे में हैं। उन चीजों को जाने देना जो आपके काम नहीं आ सकती हैं, नए विचारों और नई अवधारणाओं को अपनाना जिनसे मदद मिलती हैं और आप फलते-फूलते हैं।Kamal Sharma Rezilum CEO and R U OK? Chair.
"नकारात्मक वे हैं जहां आप अपने समूह से चिपके रहते हैं, और इसलिए आपको चुनौती नहीं दी जाती है, पूरी तरह से सब कुछ थामे रखने की कोशिश कर रहे हैं जैसा कि उस समय था जब आप चले गए थे।"
"मुझे लगता है कि खुद को चुनौती देना वास्तव में महत्वपूर्ण है नए विचारों के साथ, यह पता लगाने के लिए कि आप कौन हैं, आप क्या हैं, और वास्तव में एक अलग संस्कृति में अपनी पहचान तलाश रहे हैं।"

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ प्रवासी निरंतर अनिश्चितता और मिश्रित भावनाओं में रहते है, और इससे जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में देरी हो सकती है, और यह उनके सधे हुये, स्थिर भविष्यमें बाधा बनता है।
उनके लिये सपोर्ट नेटवर्क की कमी अक्सर अकेलेपन, चिंता और चिड़चिड़ेपन की भावनाओं को बढ़ा देती है।
कमल शर्मा एक भिक्षु यानि मॉंक हैं। वह कहते हैं कि आप जहां रहते हैं वहां की स्थानीय संस्कृति में भाग लेना और एकीकृत करने का तरीका खोजना इन मुद्दों को दूर करने का एक तरीका है। उन्होंने अपने मामले में, एक टीम खेल में शामिल करके किया।
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लेकिन, व्यावहारिक कदम उठाने से परे, जैसे किसी गतिविधि या क्लब में शामिल होना, व्यायाम करना या ध्यान लगाना, ऐसे कई और दार्शनिक दृष्टिकोण हैं जिन्हें आप लागू कर सकते हैं, और यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप पूर्वी या पश्चिमी तरीकों में से क्या पसंद करते हैं।
“मैंने जो पश्चिमी साहित्य देखा है, वह परिवर्तन प्रबंधन के बारे में है, परिवर्तन में फलता-फूलता है। यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि आप परिवर्तन के अनुकूल हो सकते हैं। और मुझे लगता है कि यह कुछ हद तक एक पश्चिमी निर्माण है।” श्री शर्मा कहते हैं।
श्री शर्मा आगे कहते हैं, “हम जिस पर ध्यान केंद्रित करते हैं वह है अस्थिरता, क्योंकि परिवर्तन के लिए आपको एक स्थिर स्थिति से जाना पड़ता है, यह दूसरी स्थिर स्थिति में बदल जाता है। अनित्यता इस बारे में है कि आप कैसे 'सर्फ़' करते हैं और जीवन के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाते हैं। इसलिए, मेरे लिए, अस्थायित्व से रहना और अस्थायित्व को स्वीकार करना है बहुत अधिक शक्तिशाली है।"

स्वयम् को अपनी स्थिती से आत्मसात करें
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आप आत्म-जागरूकता पर काम करें। इसका मतलब है, आप कैसा महसूस कर रहे हैं, इसको समझे और अगर आप अभिभूत हैं तो मदद लें।
"बहुत से लोग जो दुखग्रस्त हो रहे हैं, वे पाते हैं कि उनके कभी-कभी दूसरे परिणाम भी होते हैं, चाहे घर पर संघर्ष हो, काम पर, या कभी-कभी शराब [दुर्व्यवहार]," डॉ। ब्लाशकी चेतावनी देते हैं।
हालांकि प्रवासियों में खोनेपन के लक्षण अक्सर आते हैं और कई सालों तक चले जाते हैं। लंबे समय तक दुःख जो अनियंत्रित हो जाता है वह और भी गंभीर रूप में विकसित हो सकता है।

हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन भावनाओं को प्रबंधित करने के लिए कोई सरल उपाय नहीं है, और खुद को उस खोयेपन के अहसास को, महसूस करने और समझने के लिये, स्वयम् को पहचानने और मानने देना भी महत्वपूर्ण है।
दु: ख का अनुभव करना कमजोरी या धैर्य की कमी नहीं है। और उपचार प्रक्रिया यानि हीलिंग व्यक्तिगत और जटिल है।
"कुछ हद तक, कोई भी नुकसान एकआघात है, और आघात को दो तरीकों से निपटाया जा सकता है: आप आघात के लक्षणों को ठीक कर सकते हैं, या आप आघात को ठीक कर सकते हैं। मैं कहूंगा कि हमें प्रवासन के नुकसान के लक्षणों को ठीक करने के साथ-साथ, उसके उपचार यानि हील करने की भी जरूरत है," श्री शर्मा कहते हैं।
"'हील' शब्द का अर्थ फिर से पूर्ण होना है, इसलिए आप एक नए वातावरण में फिर से संपूर्ण बनना शुरू करते हैं।"
“पुराने को जाने दो और नए को जगह दो। विकल्प उपचार प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा है," श्री शर्मा ने निष्कर्ष निकालते हुये कहा।
यदि आपको भावनात्मक सपोर्ट की आवश्यकता है, तो आप Lifeline 13 11 14 पर लाइफलाइन से संपर्क कर सकते हैं या 1800 22 46 36 पर Beyond Blue बियॉन्ड ब्लू से संपर्क कर सकते हैं।
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