प्रमुख बातें
- ऑस्ट्रेलियाई युद्धों को तभी स्वीकार किया जा सका जब 'टेरा नुलियस' की उद्घोषणा को कानूनी रूप से चुनौती दी गई और पलट दी गई।
- 1788 में पहले बेड़े के आगमन से लेकर 1930 के दशक के मध्य तक ऑस्ट्रेलियाई युद्ध पूरे महाद्वीप में लड़े गए।
- विशेषज्ञों की टीमों द्वारा उजागर किए गए औपनिवेशिक रिकॉर्ड और पुरातात्विक साक्ष्य संघर्ष के भयावह पैमाने को दर्शाते हैं।
सामग्री चेतावनी: इस लेख और पॉडकास्ट एपिसोड में हिंसा के संदर्भ हैं जो कुछ लोगों को परेशान कर सकते हैं।
जब कैप्टन जेम्स कुक पहली बार ऑस्ट्रेलिया के नाम से जाने जाने वाले तट पर पहुंचे Captain James Cook first arrived , तो उन्होंने इस विशाल भूमि को 'टेरा न्यूलियस', यानि किसी की भी भूमि नहीं, घोषित किया। हालांकि, द्वीप महाद्वीप सैकड़ों विभिन्न आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर राष्ट्रों और कुलों का घर था - सैकड़ों हजारों स्वदेशी लोग जिन्हें तुरंत ब्रिटिश क्राउन के लिये बस एक 'विषय' माना जाने लगा था।
यह फ्रंटियर युद्धों Frontier Wars, के लिए एक ट्रिगर यानि एक कारण बन गया, स्वदेशी लोगों और सेटलरस् यानि यहाँ आकर बसने वालों के बीच क्रूर संघर्ष जिसने ऑस्ट्रेलिया की नींव को चिह्नित किया। एक ऐसा इतिहास जिसे बस अभी ही पहचाना जाने लगा है।
फिल्म निर्माता रेचल पर्किन्स Filmmaker Rachel Perkins यूरोपीय विरासत वाली एक अर्रेन्डा और कालकाडून महिला हैं। उन्होंने "द ऑस्ट्रेलियन वॉरस् " का निर्माण किया, जो एक वृत्तचित्र श्रृंखला है और जो ब्रिटिश सेटलरस् से अपनी भूमि की रक्षा करने वाले स्वदेशी लोगों के संघर्ष को दिखाती है।
ये वे युद्ध थे जो ऑस्ट्रेलिया में लड़े गए थे और वे ऐसे युद्ध थे जिन्होंने वास्तव में आधुनिक ऑस्ट्रेलियाई देश बनाया।Rachel Perkins, Filmmaker.
ऑस्ट्रेलियाई युद्ध The Australian wars 1788 में पहले बेड़े के आगमन से लेकर 1930 के मध्य तक पूरे महाद्वीप में लड़े गए, लेकिन इन संघर्षों को स्कूल में नहीं पढ़ाया गया या 20वीं सदी के अंत तक युद्ध के रूप में स्वीकार भी नहीं किया गया।
प्रोफेसर हेनरी रेनॉल्ड्स Professor Henry Reynolds ऑस्ट्रेलिया के सबसे सम्मानित इतिहासकारों में से एक हैं और युद्ध के विशेषज्ञ हैं। जब उन्होंने 1966 में इतिहास पढ़ाना शुरू किया, तो इतिहास की किताबों में आदिवासी लोगों का लगभग कोई संदर्भ नहीं था।
"यह केवल दो बार आदिवासियों का उल्लेख करता है, केवल संकेतिक रूप में ऐसे ही में, और सूचकांक में एक प्रविष्टि भी नहीं थी", वे कहते हैं।
द ऑस्ट्रेलियन वॉरस् का ट्रेलर देखें:
प्रो रेनॉल्ड्स का कहना है कि यह आंशिक रूप से इसलिए था क्योंकि 20 वीं शताब्दी के मध्य में फ्रंटियर युद्धों को पूर्ण पैमाने पर युद्ध के रूप में नहीं माना जाता था, क्योंकि यह संघर्ष गुरिल्ला युद्ध के समान था।
"दृष्टिकोण यह था कि यह बहुत छोटा था और युद्ध की गंभीरता के रूप में माने जाने के मुकाबले बिखरा हुआ था। कोई वर्दी नहीं थी, कोई मार्चिंग सैनिक नहीं था ... वास्तव में कभी भी सही अर्थों में बड़ी संरचनाओं और लड़ाइयों का मामला नहीं था, लेकिन फिर भी, यह स्पष्ट रूप से युद्ध का एक रूप था।”
ऑस्ट्रेलियाई फ्रंटियर युद्धों के एक अन्य विशेषज्ञ इतिहासकार डॉ. निकोलस क्लेमेंट्स Historian Dr. Nicholas Clements, इस बात से सहमत हैं। उनका कहना है कि यह गलत धारणा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों का परिणाम है, जिसने युद्ध को देखने के तरीके को बदल दिया।
हालाँकि, इस प्रकार के बड़े पैमाने पर युद्ध मानव जाति के इतिहास में असामान्य हैं।
"वे इसे तब एक युद्ध के रूप में जानते थे। सभी औपनिवेशिक दस्तावेजों को युद्ध कहा जाता है, लेकिन 20वीं और 21वीं सदी में, हम उस पर से दृष्टि खो चुके हैं। और मुझे लगता है कि कुछ अंतर्निहित राजनीतिक कारण भी हैं कि बहुत से लोग इसे युद्ध के रूप में क्यों नहीं पहचान सकते हैं, "डॉ क्लेमेंट्स का कहना हैं।
रेचल पर्किन्स कहती हैं, कि वे राजनीतिक कारण 'टेरा न्यूलियस' की घोषणा और ब्रिटिश कानून के बीच एक कानूनी विरोधाभास पर आधारित हैं। आदिवासी लोगों को क्राउन का विषय घोषित किया गया था, इस प्रकार, साम्राज्य "आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा नहीं कर सकता था ...
"हालांकि, अंग्रेजों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल किया कि महाद्वीप पर उनका कब्जा सफल रहे," वह आगे कहती हैं।

माबो और 'टेरा नुलियस' को नकारना
ऑस्ट्रेलियाई युद्धों को तभी स्वीकार किया जा सका था जब 1990 के दशक की शुरुआत में 'टेरा न्यूलियस' की घोषणा को कानूनी रूप से चुनौती दी गई और उसे नकार दिया गया। इसे ऐतिहासिक माबो निर्णय के रूप में जाना जाता है।
"इस समय तक, यह विचार था कि आदिवासियों के पास भूमि नहीं थी, इसलिए लड़ाई भूमि के नियंत्रण के बारे में नहीं हो सकती थी क्योंकि उनके पास भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं था। 1992 और उस फैसले के बाद, युद्ध की प्रकृति को बदलना पड़ा क्योंकि स्पष्ट रूप से यह उन मुद्दों के बारे में था जिनके बारे में युद्ध हमेशा से रहा है: क्षेत्र पर नियंत्रण, "प्रो रेनॉल्ड्स कहते हैं।
डॉ क्लेमेंट्स का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में भूमि के स्वदेशी स्वामित्व को मान्यता देने में ब्रिटिश साम्राज्य की विफलता एक ऐतिहासिक विसंगति है।
"ऑस्ट्रेलिया के ब्रिटिश उपनिवेश के दिल में एक त्रुटिपूर्ण आधार था। अन्य सभी देशों के विपरीत, जिन्हें ब्रिटिश उपनिवेश बनाते थे, उन्होंने यहां ऑस्ट्रेलिया में स्वदेशी मालिकों की संप्रभुता को स्वीकार नहीं किया। उसके कारण, कोई संधि नहीं हुई, स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने का कोई प्रयास नहीं किया गया और आज तक हम कानूनी दृष्टिकोण से यह समझने के लिए संघर्ष करते हैं कि जमीन के लिए उनके अधिकार क्या हैं
और बातचीत करने में विफलता के कारण क्रूर रक्तपात हुआ।
विशेषज्ञों की टीमों द्वारा उजागर किए गए औपनिवेशिक रिकॉर्ड और पुरातात्विक साक्ष्य संघर्ष के भयावह पैमाने को प्रदर्शित करते हैं।
अकेले ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय संग्रहालय में The National Museum of Australia आदिवासी पूर्वजों के 400 से अधिक अवशेष साक्ष्य हैं, जिनमें से कई फांसी, हत्या और हत्याकांड से मृत्यु के प्रमाण दिखाते हैं।
रेचल पर्किन्स का कहना है कि जो बच गए उनके वंशज हमेशा याद रखेंगे।
बहुत सारे आदिवासी लोग इतिहास को आगे बढ़ाने वाले रहे हैं। आदिवासी लोगों ने उनके साथ जो हुआ उसकी कहानियां हमें, हमारे परिवारों में सौंप दी हैं। इसलिए, मैं क्वींसलैंड में अपने लोगों के नरसंहार के बारे में जानकर बड़ी हुई और मैं अपनी परदादी के हिंसक बलात्कार आदि के बारे में जानती थी।Rachel Perkins, Filmmaker.
द ब्लैक वार
तस्मानिया की ब्लैक वॉर, Black War (1824-1831) ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में सबसे अधिक प्रचण्ड और गहन सीमा संघर्ष थी।
रेचल पर्किन्स ऑस्ट्रेलियाई युद्ध श्रृंखला में कहती हैं, "ब्लैक वॉरस् (Black Wars) के दौरान कोरिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और संयुक्त शांति अभियानों में मरने वाले तस्मानियाई लोगों की तुलना में अधिक तस्मानियाई लोग मारे गए।"
डॉ. निकोलस क्लेमेंट्स का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से हिंसा का स्तर इतना तीव्र था कि औपनिवेशिक अधिकारी और सेटलरस् "डर गए" थे।
"आदिवासी प्रतिरोध असाधारण था। औपनिवेशिक दुनिया में हर कोई किसी ऐसे व्यक्ति को जानता था जो आदिवासी लोगों द्वारा मारे गए या घायल हुए थे, जिनके खेतों को जला दिया गया था। यह अत्यधिक भयानक था, ”वे कहते हैं।
वास्तव में, महत्वपूर्ण लोग तो कॉलोनी छोड़ने पर विचार करने लगे थे।Dr Nicholas Clements, Australian Historian.
लेकिन यूरोपीय जीत गए, और स्वदेशी तस्मानियाई लोगों का लगभग सफाया कर दिया।
यौन हिंसा के कारण संघर्ष और तेज हो गया।
"हिंसा के लिए ट्रिगर, जिस माचिश की तीली से यह संघर्ष की चिंगारी लगी थी, वह यौन हिंसा थी," डॉ क्लेमेंट्स कहते हैं।
आदिवासी महिलाओं का प्रणालीगत बलात्कार और अपहरण इतना आम था कि वह कुछ आदिवासी कुलों के जीवित रह जाने का श्रेय उस यौन हमले को देते हैं।
"इसीलिये आज तस्मानिया में हमारे आदिवासी वंशज केवल मात्रभर ही मौजूद हैं , यह संयोग ही है क्योंकि वे तो बड़े पैमाने पर हिंसा से लगभग पूरी तरह से मिटा दिए गए थे," डॉ क्लेमेंट्स कहते हैं।

आग का आग से ही लड़ना
ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में आदिवासी प्रतिरोध को कुचलने के लिए, उपनिवेशवादियों ने मूल लोगों की पुलिस बनाई, एक प्रशिक्षित अर्धसैनिक बल जिसे आतंक पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
“आपने देशी सैनिकों की भर्ती की और आपने उन्हें एक सैन्य बल के रूप में इस्तेमाल किया। यह निस्संदेह आदिवासी प्रतिरोध को तोड़ने में प्रमुख शक्ति थी, ”प्रोफेसर रेनॉल्ड्स कहते हैं।
पुरुषों को वर्दी, बंदूकें और घोड़े दिए गए। डॉ क्लेमेंट्स का मानना है कि श्वेत अधिकारियों ने कुशलतापूर्वक अपने मतलब के लिये उन्हीं का प्रयोग किया, उनके साथ हेराफेरी की, उनके पारंपरिक आदिवासी ज्ञान और बुश कौशल को इस्तेमाल किया।
“अकेले क्वींसलैंड में स्थानीय पुलिस द्वारा लिया गया टोल हजारों में था। मेरा मानना है कि अनुमान 60 से 80,000 तक है, जो बिल्कुल चौंका देने वाला है, और इससे इस पूरे घृणित भयानक काम पर एक नैतिक बादल छा जाता है, नैतिकता का सवाल उठता है," वे कहते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई युद्धों की वृत्तचित्र श्रृंखला के निर्माण के दौरान रेचल पर्किन्स को इस पूरे इतिहास का पता चला और उसका सामना करना पड़ा था।
वह कहती हैं, "मुझे एक रिकॉर्डिंग मिली जो मेरी दादी द्वारा अपनी मां के परिवार के नरसंहार के बारे में बात करते हुए बनाई गई थी, जिसे मैंने पहले कभी नहीं सुना था और मैं उस जगह पर कभी नहीं गयी थी जहां यह हुआ था, और मुझे वास्तव में तब तक पता नहीं चला था कि यह कहां हुआ था जब तक मैंने यह वृत्तचित्र श्रृंखला बनाई। ”
डॉ क्लेमेंट्स, जिनके पूर्ववर्ती सेटलर थे, उनका मानना है कि सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को शर्म की भावनाओं को दूर करने और पिछले अन्याय पर प्रकाश डालने की जरूरत है।
“किसी के पूर्वज इसमें शामिल थे या नहीं, हम सभी उस आदिवासी भूमि के उत्तराधिकारी हैं, जो भूमि चोरी की गई थी। कम से कम, हम सभी को इस इतिहास का अनावरण करने, इस इतिहास के साथ जीने और एक सकारात्मक भविष्य में अपनी भूमिका निभानी है। ”

इस इतिहास को क्यों नहीं मनाया जाता है?
प्रोफेसर रेनॉल्ड्स का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया, एक ऐसा देश जो अपने कई युद्ध स्मारकों में अपने शहीद सैनिकों का सम्मान करता है, उसको इस तथ्य को खुले तौर पर पहचानने की जरूरत है कि फ्रंटियर युद्ध हुए और वह मानवता के खिलाफ आपराधिक कृत्यों से ग्रस्त थे।
"ऐसा कैसे है कि हम ऑस्ट्रेलियाई युद्धों के स्वीकार नहीं कर सकते?" वह सवाल करते है।
"संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसा नहीं है, वे [मूल अमेरिकियों] के साथ सभी संघर्षों को आधिकारिक तौर पर युद्ध के रूप में पहचानते हैं। न्यूजीलैंड में स्पष्ट रूप से ऐसा नहीं है, मोरी युद्ध हमेशा से इतिहास का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।"
रेचल पर्किन्स का कहना है कि इस विसंगति का कारण सरल है।
"ऑस्ट्रेलिया दुनिया की उन अनोखी जगहों में से एक है जहाँ से उपनिवेशवादी जैसे गये ही नहीं," वह कहती हैं।
उपनिवेशवादी या बसने वाले जो उनके साथ आए थे, वे सत्ता में बने हुए हैं, इसलिए मुझे लगता है कि राष्ट्र के लिए उन लोगों को स्वीकार करना या उनका जश्न मनाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है जिन्होंने देश की रक्षा की क्योंकि औपनिवेशिक कब्जे वाली ताकत तो गयी ही नहीं है!Rachel Perkins, Filmmaker.
डॉ क्लेमेंट्स का मानना है कि 'ऐसा न हो कि हम भूल जाएं', आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों को सम्मानित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वाक्यांश, उन योद्धाओं के लिये भी होना चाहिए जिन्होंने अपनी भूमि पर ब्रिटिश कब्जे के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
"अगर मेरा देश साहस के साथ अपने अतीत, अपने पूर्ववर्तियों की गलतियों को स्वीकार करता है, और भविष्य में अपनी क्षमता के अनुसार उन गलतियों को ठीक करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, तो मुझे बहुत गर्व होगा ... मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे वहाँ जाएं, जहां परिदृश्य, चाहे वह स्मारकों के साथ हो या चाहे वह दोहरे नामकरण के साथ हो, आदिवासी सभ्यता है, यह मौजूद है, जहाँ इसे स्वीकार किया जाता है। ”
ऑस्ट्रेलियन वॉरस् The Australian Wars एसबीएस ऑन डिमांड पर पांच भाषाओं में स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध है: सरलीकृत चीनी, अरबी, पारंपरिक चीनी, वियतनामी और कोरियाई। यह श्रृंखला नेत्रहीन या दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए ऑडियो विवरण/उपशीर्षक के साथ भी उपलब्ध है।
यह सामग्री पहली बार सितंबर 2022 में प्रकाशित की गई थी।






