अपनी जीत पर जो बाइडेन ने कहा कि वह अमेरिका के लोगों को एक बार फिर जोड़ने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में नस्लीय भेदभाव दूर करने और जलवायु परिवर्तन पर काबू पाने के लिए काम होगा.
मुख्य बातें:
- अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में जो बाइडेन और कमला हैरिस को विजयी घोषित किया गया है.
- बाइडेन इससे पहले दो बार उपराष्ट्रपति रह चुके हैं.
- बाइडेन की ज़िंदगी काफी उतार चढ़ावों से गुज़री है, साल 1972 में उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी को खोया और साल 2015 में अपने बड़े बेटे को.
जॉसेफ रॉबिनेट बाइडेन अमेरिका की राजनीति के इस सर्वोच्च पद पर अमेरिका के सेनेटर और उपराष्ट्रपति रहने के बाद पहुंचे हैं.
राष्ट्रपति पद के लिए उनका अभियान उनके प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव के इर्द गिर्द रहा. हालांकि उन्होंने अमेरिका में कोविड 19 महामारी के हालात पर अपने दिल का दर्द भी लोगों को दिखाया.
जो बाइडेन अमेरिका के मौजूदा चुनावी दंगल में तब आ गये थे जबकि अमेरिका में कोविड महामारी का कहर कहीं नहीं था. और लोगों का मास्क पहनकर घूमना असामान्य लगता था. ये साल 2019 का अप्रैल महीना था.
हालांकि इससे पहले भी वह साल 1987 और 2007 में ये कोशिश कर चुके थे.

जो बाइडेन का वाइट हाउस पहुंचने का सपना तब एक बार फिर परवान चढ़ा जबकि बराक ओबामा ने उन्हें उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया और बराक ओबामा के साथ उन्होंने एक नहीं बल्कि दो बार दो बार उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली.
वह साल 2009 से जनवरी 2017 तक इस पद पर रहे.
जो बाइडेन और बराक ओबामा की जोड़ी काफी करीबी रही और इनके फैसलों को लोगों ने पसंद भी किया. एक मौका था जब राष्ट्रपति ओबामा ने एक समारोह में अचानक जो बाइडेन को प्रेसिडेंशल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया. अचानक ये घोषणा सुन बाइडेन रो पड़े थे.
हालांकि ये खुशी के आंसू थे लेकिन श्री बाइडेन हमेशा इतने खुशनसीब नहीं रहे हैं. साल 1972 में जब वह कांग्रेस के नवनिर्वाचित सदस्य बने थे, वॉशिंगटन में एक कार दुर्घटना में उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी को खो दिया था.

इस वाकये को बताते हुए एक बार उन्होंने कहा था, "उन्हें मेरे बेटों को मौत के मुंह से निकालने में ढाई घंटे का वक्त लगा था. मेरा एक बेटा कार की पिछली सीट पर अपनी मृतक बहन के ऊपर था. जबकि दूसरा अपनी मृतक मां के ऊपर."
जो बाइडेन ने उस वक्त अस्पताल में अपने बेटों के कमरे से शपथ ग्रहण की थी. इन चुनावों में भी उन्होंने कई जगह अपने उस दुखद अनुभव को साझा किया
उनका बड़े बेटे बो एक उभरते हुए नेता थे. लेकिन उनकी साल 2015 में ब्रेन कैंसर से मौत हो गई. साल 2016 में उन्होंने पारिवारिक स्थितियों का हवाला देकर राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी छोड़ दी थी.
जो बाइडेन के पास यूं तो काफी राजनीतिक और सामाजिक अनुभव है लेकिन उन पर यौन उत्पीड़न जैसे आरोप भी लगे. हालांकि इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी.
उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए एक बहस के दौरान अपने साथी प्रतिद्वंद्वी सेनेटर के हमलों का शिकार भी होना पड़ा था.
कमला हैरिस ने उनकी पूर्व की नीतियों और जाति पर उनके बयानों पर उन्हें घेरा था.
डेमोक्रेटिक पार्टी में इस बार अपनी उम्मीदवारी के समय भी वह काफी दबाव में थे. लोवा में वह चौथे स्थान पर थे और हैम्पशर में पांचवें. उनके अभियान को तब बल मिला जब उन्होंने साउथ कैरोलाइना में जीत हासिल की.
और काफी मशक्कत के बाद जो बाइडेन डोनाल्ड ट्रंप के साथ चुनाव लड़ने के लिए अपनी पार्टी की पसंद बन सके.
तीन बार के असफल उम्मीदवार जो बाइडेन अब अमेरिका के प्रेसिडेंट-इलेक्ट हैं.




