Silver Urns City Palace Jaipur Source: Flickr/Rakesh
गुलाबी शहर में सिटी पैलेस परिसर की भव्यता में खोया पर्यटक, सर्वतो भद्र चौक (दीवाने-ए- ख़ास) पर पहुंचते ही दर्शनार्थ रखे गए शुद्ध चांदी से बने दो बड़े-बड़े चमचमाते गंगाजली कलशों की सुन्दरता और विशालता पर मुग्ध होकर उनको एकटक निहारता ही रह जाता है ! पांच फीट दो इंच ऊंचे,14 फीट 10 इंच गोलाई लिए, 4000 लीटर धारण क्षमता वाले, 340 किग्रा. वजनी शुद्ध चांदी से बने सबसे बड़े पात्र होने के कारण ये कलश गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज हैं. 1894 में बिना जोड़ के बने इन कलशों को जयपुर राज्य के खजाने से 14000 झाड़शाही चांदी के सिक्कों को पिघलाकर बनाने में दो वर्ष लगे. जिन्हें जयपुर राज्य के 36 कारखानों में से एक मिस्त्री खाने के दो सुनार गोविंदराम और माधव ने तैयार किया था. इतने बड़े कलशों को सरलता से सरकाने के लिए कलशों के आधार पर छोटे पहिए वाली प्लेट लगाई गई थी.आलेख विजय जयादा। प्रस्तुतीकरण कुमुद मिरानी
गुलाबी शहर में सिटी पैलेस परिसर की भव्यता में खोया पर्यटक, सर्वतो भद्र चौक (दीवाने-ए- ख़ास) पर पहुंचते ही दर्शनार्थ रखे गए शुद्ध चांदी से बने दो बड़े-बड़े चमचमाते गंगाजली कलशों की सुन्दरता और विशालता पर मुग्ध होकर उनको एकटक निहारता ही रह जाता है ! पांच फीट दो इंच ऊंचे,14 फीट 10 इंच गोलाई लिए, 4000 लीटर धारण क्षमता वाले, 340 किग्रा. वजनी शुद्ध चांदी से बने सबसे बड़े पात्र होने के कारण ये कलश गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज हैं. 1894 में बिना जोड़ के बने इन कलशों को जयपुर राज्य के खजाने से 14000 झाड़शाही चांदी के सिक्कों को पिघलाकर बनाने में दो वर्ष लगे. जिन्हें जयपुर राज्य के 36 कारखानों में से एक मिस्त्री खाने के दो सुनार गोविंदराम और माधव ने तैयार किया था. इतने बड़े कलशों को सरलता से सरकाने के लिए कलशों के आधार पर छोटे पहिए वाली प्लेट लगाई गई थी.आलेख विजय जयादा। प्रस्तुतीकरण कुमुद मिरानी