1996 के वर्ल्ड कप के दौरान मनु ने सचिन तेंडुलकर को खेलते हुए देखा था. तभी से उनके मन में सचिन और क्रिकेट के प्रति प्यार जगा. फिर उन्होंने खुद खेलना शुरू किया. मनु ने पंचकुला के लिए जिला स्तर पर टीम में जगह भी बना ली थी. लेकिन जिंदगी को कुछ और मंजूर था. तब मनु के पिता नहीं रहे और क्रिकेट भी नहीं रहा.
जब मनु ऑस्ट्रेलिया आए तो उन्होंने फिर से क्रिकेट खेलना शुरू किया. इस बार एक चोट के कारण उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा. लेकिन यह ऐसा खेल है जो मन में बस जाए तो छूटता नहीं है. मनु के साथ भी यह हुआ. वह बताते हैं, "मैं स्टीव वॉ और और मैक्ग्रा फाउंडेशन के साथ जुड़ गया और क्रिकेट को प्रमोट करने के लिए काम करने लगा."
अब मनु सिंह भारत में खासतौर पर महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए जोर लगाए हुए हैं. वह बताते हैं, "भारत में लोकल लेवल पर क्रिकेट को बहुत कम समर्थन मिलता है. आर्थिक तो छोड़ दीजिए, माता-पिता की ओर से भावनात्मक समर्थन भी नहीं मिलता. हमें उस स्थिति को बदलना है."

Manu Sparatn Singh with Sachin Tendulkar Source: Supplied
मनु बताते हैं कि जब भारत और ऑस्ट्रेलिया का मैच होता है तो वह भारत का समर्थन करते हैं. क्यों? ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले मनु कहते हैं,"भारत हमारी जन्मभूमि है. मां है. उसका साथ तो देना ही है. ऑस्ट्रेलिया मेरी गोद लेने वाली मां है. बाकी हर हालात में मैं उसका साथ दूंगा."



