कादर खान – दार्शनिक, आँसु और ठहाकों भरे शब्दों का जादुगर

Indian Actor Kader Khan

Indian Actor Kader Khan Source: Bollywood Hungama/ CC BY 3.0/ Wikimedia commons

एक लेखक, कलाकार के तौर पर सफल, कादरखान ने बोलचाल की भाषा में संवाद लिख कर लोगों के मन में अपनी एक अलग जगह बना ली थी। । विभिन्न फिल्मों में कादर खान दवारा लिखे कुछ संवादों के साथ , उनके प्रति है यह एक श्रद्धांजली अंश ...


यह  कादर ख़ान के संवाद ही थे जिन्होने  फिल्मी दुनिया में कई कलाकारों को नयी ऊचाईयाँ दी। एक ओर अमिताभ बच्चन और गोविन्दा की फिल्मों में लिखे उनके संवादों ने उन फिल्मों की सफलता में बड़ा रोल निभाया तो वहीं स्वयम् फिल्मों में अलग अलग तरह के रोल करके अपनी अभिनय प्रतिभा का भी परिचय दिया ।

 70 के दशक की सुपर हिट फिल्म मुक़द्दरकासिकंदर में कादर ख़ान, फ़कीर बाबा बने हुये थे जो अमिताभ बच्चन को ज़िंदगी की सच्चाई और उसकी गहराई के सार को समझाते हैं। इस फिल्म का यह संवाद आज भी याद किया जाता है..

'सुख तो बेवफ़ा है आता है जाता है, दुख ही अपना साथी है, अपने साथ रहता है। दुख को अपना ले तब तक़दीर तेरे क़दमों में होगी और तू मुक़द्दर का बादशाह होगा।’

 इसी तरह सुपर हिट फिल्म कुली के कई संवादों, जिन्हें कादर खान ने लिखा, उनसे अमिताभ को एक नई ऊंचाई मिली। यह संवाद - 'बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरख्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है 'इक़बाल'' आज भी हिट है। और 90 के दशक की सुपर हिट फिल्म अग्निपथ का संवाद आज भी कई कलाकारों द्वारा अभिनीत किया जाता है। - 'विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल 9 महीना 8 दिन और ये सोलहवां घंटा चालू है। ‘

फिल्म सत्तेपेसत्ता का वह एक सुपर हिट सीन था - दारू पीने से लीवर ख़राब हो जाता है,  यह लीवर- कादर खान ने ही लिखा था।'

Indian Actor Kader Khan
Indian Actor Kader Khan Source: Wikimedia Commons/Bollywood Hungama/ CC-BY-3.0


अफगानिस्तान में जन्में कादर खान ने चाहे फिल्म राज से लेखन की शुरूवात की लेकिन फिल्म रोटी ने उन्हें वह प्रसिद्धी दिलाई जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नही देखा।

उनके संवादों में सरलता, ठिठोली , उपहास और गम्भीरता के साथ साथ दार्शनिकता का पुट भी होता था। यूँ वह अपने द्विअर्थी और कभी कभी सीमा लाँघते संवादों की वजह से आलोचना का पात्र भी बनते थे।

कादर खान को उनके फिल्मों में योगदान के लिए साहित्य शिरोमनी अवार्ड से सम्मानित किया गया और बेस्ट डायलॉग के लिए दो बार उन्हें फिल्म फेयर एवार्ड दिया गया । 1991 में बेस्ट कॉमेडियन का और 2004 में बेस्ट सपोर्टिंग रोल का फिल्म फेयर एवार्ड मिला है। इसके अलावा कादर खान को कई बार बेस्ट कॉमेडियन के तौर पर फिल्म फेयर एवार्ड के लिये नामांकित किया गया था।

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