पिछले दिनों भारत में इस बात पर लंबी बहस चली कि निजता का अधिकार आपका मूल अधिकार है या नहीं. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि निजता का अधिकार किसी भारतीय नागरिक का मूल अधिकार नहीं है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट सरकार की इस दलील को नकार दिया और एकमत से ऐतिहासिक फैसला दिया कि निजता का अधिकार किसी भी नागरिक का मूल अधिकार है. लेकिन इसके मायने क्या हैं? और ऑस्ट्रेलिया में निजता का अधिकार यानी प्राइवेसी लॉ क्या कहता है? आइए समझते हैं कानून की एक जानकार से.
मॉलीना अस्थाना विक्टोरियन गवर्नमेंट के सॉलिसिटर्स ऑफिस में प्रिंसीपल सॉलिसिटर हैं. वह बताती हैं कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद निजता के अधिकार को जीने के मूल अधिकार से जोड़ दिया गया है यानी अब आप अपनी निजी सूचनाओं की रक्षा उसी तरह कर सकते हैं जैसे आप अपनी जिंदगी की सुरक्षा करते हैं.
अस्थाना बताती हैं कि भारत में निजता को लेकर किसी तरह के कानून नहीं हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया में केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर ऐसे कानून मौजूद हैं जो लोगों की निजता की सुरक्षा करते हैं. पूरा इंटरव्यू सुनिए ताकि आपको पता चले कि ऑस्ट्रेलिया में कानून आपकी निजता को कैसे देखता है और उसके लिए आप क्या कर सकते हैं.



