जगदीश ने जब मार्टिन प्लेस के कॉफी शॉप में कॉफी पीते हुए राज से पूछा कि उसकी उम्र क्या है तो राज ने मजाक उड़ाया कि उम्र जब 40 साल से ज्यादा हो जाए तो पूछना बदतमीजी है. राज का कहना सही था कि उम्र बताने की नहीं महसूस करने की चीज है. जब ये लगे कि हम दीवार को धक्का मार कर गिरा सकते हैं तो समझो जवानी बाकी है. जब घुटने आवाज देने लगें, गले की खाल जगह छोड़ दे और लड़कियां अंकल कहने लगें तो समझो बुढ़ापा आ गया है. लेकिन जगदीश संजीदा था. राज को उम्र बतानी पड़ी. उसने एक दो साल इधर उधर करके अपनी उम्र 48 साल बताई.
“ये तो गुजरे हुए साल हैं. कितने साल बाकी हैं, उम्र वो है.” जगदीश ने कहा तो राज हंस पड़ा और बोला, "ये तो सिर्फ भगवान को मालूम है."
"भाई, मैं भगवान तो नहीं हूं लेकिन ये बता सकता हूं कि तुम कितने साल अभी और जी सकते हो." जगदीश ने संजीदगी से कहा और फिर राज की उम्र का हिसाब लगाने लगा. जो सवाल-जवाब हुए वे कुछ इस तरह थे.
ये बताओ, जब तुम हिंदुस्तान से ऑस्ट्रेलिया आए थे तो उम्र क्या थी ?
25 साल.
यानी तुम हिंदुस्तान में 25 साल रहे जहां जिंदा रहने की एवरेज उम्र है 65. 23 साल से तुम ऑस्ट्रेलिया में हो जहां एवरेज उम्र है 82. इस तरह तुम्हारी एवरेज उम्र हुई 73. समझ में आया?
भाई जगदीश, इसका मतलब है कि मैं 73 की उम्र में मर जाऊंगा?
इतनी जल्दी नहीं, अभी हिसाब बाकी है. ये बताओ, तुम्हारे पिताजी, दादा, चाचा, ताया किस उम्र में भगवान को प्यारे हुए?
पिताजी 68 के थे तो स्वर्गवासी हो गए. एक चाचा 66 और दूसरे 62 की उम्र में. दादा की उम्र 67 थी और परदादा की 57.
ओह, जेनेटिकली तुम्हारी उम्र कम है. 68, 66, 62,67 और 57. यानी एवरेज हुए 64. पिछले एवरेज को मिलाकर नया एवरेज हो गया 68.
जगदीश भाई आपने तो मेरी उम्र पांच साल कम कर दी?
अभी नहीं, अभी हिसाब पूरा नहीं हुआ है. तुम्हारा लाइफ स्टाइल अच्छा है. तुम सिगरेट-शराब नहीं पीते. एक्सरसाइज करते हो. शहर से बाहर रहते हो जहां हवा साफ है और ऑक्सीजन ज्यादा है. समझो पांच साल तुम्हारी उम्र में बढ़ गए. ऑस्ट्रेलिया का मेडिकेयर सिस्टम बहुत अच्छा है. दवा-दारू, अच्छा इलाज उम्र में 5 साल और बढ़ा देगा. आखिरी उम्र किसी ओल्ड विलेज में रहने चले गए तो तुम्हारी जिंदगी दो-तीन साल और बढ़ जाएगी. अब लगाओ हिसाब.
वाह जगदीश भाई, मेरी उम्र तो आपने 80 साल तक पहुंचा दी. थैंक यू. मै चलता हूं मुझे अपनी बीवी को ये खबर सुनानी है कि उसके जल्दी विधवा होने का कोई चांस नहीं है.
राज ने कहकहा लगाया. वह जाने लगा तो उसने जगदीश को भी चलने की दावत दी. जगदीश का घर उसके रास्ते में था और अक्सर वो उसे ड्रॉप करते हुए जाता था. लेकिन जगदीश को अभी नहीं जाना था. उसे अभी एक और कॉफी पीनी थी और अपनी उम्र का हिसाब भी लगाना था.
दूसरी शाम जगदीश कॉफी शॉप में अपनी पसंदीदा मेज पर बैठा राज के आने का इंतजार कर रहा था. राज को आज दफ्तर से निकलने में शायद देर हो गई थी. उसी वक्त उसने रवि को देखा. वो राज के साथ काम करता था.
जगदीश ने रवि से राज के बारे में पूछा तो उसने हैरत से उसे देखा. “क्या आपको नहीं मालूम? राज का कल एक्सिडेंट हो गया. सामने से आता एक ट्रॉलर बेकाबू होकर उसकी गाड़ी से टकरा गया था. मौके पर ही उसकी जान चली गई. दफ्तर में उसकी कंडोलेंस मीटिंग थी. अभी वहीं से आ रहा हूं.”
