Key Points
- सांस्कृतिक बर्निंग, एक स्वदेशी प्रथा है जिसे जंगल की आग को कम करने और देश के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए "आजमाये" तरीके की तरह देखा जा रहा है।
- नेटिव टाइटिल आदिवासी समुदायों को उनके ज्ञात तरीके से सांस्कृतिक बर्निंग को पुनर्जीवित करने के लिए हरी झंडी देता है, और साक्ष्य दर्शाते हैं कि यह कारगर है।
- पारंपरिक आग लगाने के लाभों में जंगल की आग को कम करने के अलावा और भी बहुत कुछ शामिल है। प्रथम राष्ट्र के लोग एक समग्र दृष्टिकोण का उपयोग करते हैं जो एक लचीले इकोसिस्टम को सपोर्ट करता है।
ऑस्ट्रेलिया में हममें से कई लोग आग को एक ख़तरे के रूप में देखते हैं - 2019-20 के ब्लैक समर की तबाही और हाल ही में, 2024 की व्यापक, तीव्र जंगल की आग को देखते हुए यह समझ में भी आता है।
लेकिन प्रथम राष्ट्र के लोगों के लिए, आग का इस्तेमाल सहस्राब्दियों से एक शक्तिशाली हथियार के रूप में किया जाता रहा है। used as a powerful too for millennia. यह भूमि प्रबंधन, जीविका नियोजन और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक था, जिसमें जंगल की आग से सुरक्षा भी शामिल है।

भूमि पर उगी घास और अन्य ईंधन को साफ करने के लिए हर साल आग लगाई जाती थी।
"मेरे पिता ने हमें बताया कि हर साल हमें खेती की कटाई पर आग जलानी पड़ती है।
वुनाम्बल गाम्बेरा एबोरिजनल कारपोरेशन की अध्यक्ष कैथरीन गूनाक कहती हैं, "सांस्कृतिक जलाना हमारे पूर्वजों का तरीका है, जीवन जीने का एक तरीका है। उन्होंने देश को फिर से जीवंत करने, विकास लाने और जंगल की आग को रोकने के लिए आग का इस्तेमाल किया।"
यह प्रथागत प्रथा - जिसे सांस्कृतिक दहन, फायरस्टिक खेती या कूल बर्निंग के रूप में जाना जाता है - उसका उपनिवेशीकरण के बाद से बड़े पैमाने पर प्रचलन नहीं है।
और शोधकर्ताओं ने पाया है researchers have established कि यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया में बुश फायर संभावना अधिक हो गई है और विनाशकारी बुश फायर लगने की आशंका अधिक है।
गूनक कहती हैं, "पुराने लोग जानते हैं कि देश को स्वस्थ रखने के लिए यह आग जलाना महत्वपूर्ण है।"
2024 में, उन्होंने एक अध्ययन का सह-लेखन किया, a study जिसमें बताया गया कि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के सुदूर उत्तरी किम्बरली में आग की स्थिति में कैसे सुधार हुआ, क्योंकि बड़े पैमाने पर पारंपरिक रूप से जलाए जाने की प्रथा को फिर से शुरू किया गया।
"हम पिछले 10 वर्षों से जंगली आग को रोकने के लिए निगरानी कर रहे हैं। प्रक्रिया में उतार-चढ़ाव रहे हैं, लेकिन अब हम वापस पटरी पर आ गए हैं।"
अध्ययन में मापा गया कि कैसे चार पारंपरिक मालिक समूह गंभीर जंगली आग को कम करने में कामयाब रहे, जो पहले इस क्षेत्र के उष्णकटिबंधीय सवाना परिदृश्य पर हावी थे।

यदि यह सिद्ध हो चुका है कि सांस्कृतिक दहन कारगर है, तो इसे हर जगह पुनर्जीवित क्यों नहीं किया जाए?
उत्तरी किम्बरली क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया के उन कुछ स्थानों में से एक है, जहाँ पारंपरिक मालिकों को भूमि के टाइटिल वापस किए जाने के बाद सांस्कृतिक जलाने के कार्यक्रम अन्य अधिकृत तरीकों के साथ-साथ चल पाए हैं।
अध्ययन के प्रमुख लेखक टॉम विजिलेंटे कहते हैं कि उन नेटिव टाइटिलस् को प्राप्त करना "एक बड़ा मोड़ था"।
"क्योंकि इसका मतलब था कि लोगों के पास भूमि का प्रबंधन करने के वे अधिकार थे, जिस तरह से वे इसे करना चाहते थे।
"राष्ट्रीय उद्यान या अन्य प्रकार की भूमि एक विकल्प है, जहाँ सरकारी एजेंसियाँ अग्नि जलाने के लिए जिम्मेदार हों। उन स्थितियों में, आदिवासी लोगों को उन क्षेत्रों में अग्नि जलाने के तरीकों को बताने की, प्रभावित करने की कोशिश करनी पड़ती है, लेकिन उन्हें खुद ऐसा करने का अधिकार नहीं है।"
ट्रेवर हॉवर्ड, ऑस्ट्रेलियन फायर एंड इमरजेंसी सर्विस अथॉरिटीज काउंसिल (AFAC) में प्रिस्क्राइब्ड बर्निंग के लिए नेशनल मैनेजर हैं।
वे किम्बरली और व्यापक सवाना क्षेत्र में स्वदेशी आग प्रबंधन को "ऑस्ट्रेलिया के अन्य हिस्सों में क्या हासिल किया जा सकता है, इसका एक अच्छा उदाहरण" मानते हैं।
"पिछले 20 वर्षों में वहां का परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है।
"वहां बहुत तीव्र, बहुत व्यापक बुशफ़ायर थे, और अब यह बहुत अधिक प्रबंधित और नियंत्रण में है, साल के सही समय पर कम तीव्रता वाली, छिटपुट आग के साथ, स्वदेशी लोगों के नेतृत्व में, विज्ञान द्वारा समर्थित कार्यक्रम चला रहे हैं।"

लेकिन श्री हॉवर्ड ने चेतावनी दी है कि इस सांस्कृतिक बर्निंग का पुनरुत्थान अभी भी एक विकासशील चरण में है।
और प्रत्येक राज्य और क्षेत्र को इससे कितना लाभ होगा, यह पारंपरिक संरक्षकों के साथ उनके जुड़ाव पर निर्भर करेगा।
“क्योंकि पूरे ऑस्ट्रेलिया में हमारे पास बहुत सारे स्वदेशी समूह हैं, और उनमें से प्रत्येक समूह का अपने स्थानीय देश से अपना लगाव है।
“इसलिए, वास्तव में प्रत्येक राज्य और क्षेत्रीय एजेंसी को उन समूहों के साथ काम करने की आवश्यकता है ताकि उनकी आकांक्षाओं और जरूरतों को समझा जा सके और उन्हें अपने देश में अपने तरीके से सांस्कृतिक दहन प्रथाओं को विकसित करने में सहायता मिल सके।”
देश में अग्नि स्वास्थ्य कैसे बहाल करती है
गैरेथ कैट इंडिजिनस डेजर्ट एलायंस में डेजर्ट पार्टनरशिप मैनेजर हैं।
वे 2012 से नार्दन टैरीटरी, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में फर्स्ट नेशंस रेंजर्स के साथ काम कर रहे हैं।
इस काम का ज़्यादातर हिस्सा पारंपरिक सांस्कृतिक आग प्रथाओं को बड़े पैमाने पर आधुनिक संदर्भ में एकीकृत करने पर केंद्रित है।
उनका मानना है कि जंगल की आग के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण के रूप में सांस्कृतिक बर्निंग सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कैसे अंजाम दिया जाता है, जिसमें परिदृश्य की ज़रूरतों को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया जाता है।
“जिन लोगों के साथ मैंने काम किया है, वे आग से निपटते के लिये मौसम की स्थिति को देखते हैं, समझते हैं कि आग कहाँ जा रही है और वह देश कैसे प्रतिक्रिया देगा।”
श्री कैट कहते हैं कि "विशेष रूप से 2019-2020 में गर्मियों में लगी बड़ी आग के बाद से" जंगल की आग को कम करने के बारे में पारंपरिक ज्ञान में नए सिरे से रुचि पैदा हुई है।
"जब लोग आग के बारे में सोचते हैं, तो वे पीछे रह गये कालेपन, उससे जुड़े खतरे के बारे में सोचते हैं," वे आगे कहते हैं।
"लेकिन जब आग को परिदृश्य पर सावधानीपूर्वक लगाया जाता है, तो यह विनाशकारी शक्ति नहीं होती है, यह एक नवीनीकरण करने वाली शक्ति होती है। यदि आप आग को सही समय पर लगाते हैं और परिदृश्य के साथ लगातार जुड़े रहते हैं, तो आग वनस्पति विविधता और नई वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक बेहतर साधन है।"

निर्धारित रूप से जलाना, जिसे बैक-बर्निंग, नियंत्रित जलाना या खतरा कम करने वाला जलाना भी कहा जाता है, एक अग्नि प्रबंधन विधि है, जिसमें सुरक्षा और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त करने के लिए विशिष्ट परिस्थितियों में जानबूझकर आग लगाई जाती है।
प्रोफेसर एंथनी डोसेटो इस अभ्यास के आसपास के नवीनतम साक्ष्य पर अंतर्दृष्टि साझा करते हैं।
वह 2024 की जांच के लिये 2024 investigation शोधकर्ताओं में से एक हैं, जो एजेंसी के नेतृत्व में, मिट्टी के स्वास्थ्य पर निर्धारित जलाए जाने पर और सांस्कृतिक जलाए जाने की तुलना करते हैं।
यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ वुलंगगांग के शिक्षाविदों और उलाडुला लोकल एबोरिजिनल लैंड काउंसिल के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
इसमें पाया गया कि दोनों तरीकों से मिट्टी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। लेकिन सांस्कृतिक रूप से जलाने से अतिरिक्त लाभ मिले।
प्रोफ़ेसर डोसेटो बताते हैं, "उदाहरण के लिए, हमने पाया कि जहाँ सांस्कृतिक रूप से जलाया गया है, वहाँ मिट्टी के घनत्व में कमी अधिक थी।"
और एजेंसी द्वारा निर्देशित निर्धारित जलाये गये उन क्षेत्रों की तुलना में , वहाँ कार्बन और नाइट्रोजन अधिक था। कार्बन और नाइट्रोजन बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे इस पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मुख्य पोषक तत्व हैं।"
प्रोफ़ेसर डोसेटो कहते हैं कि यह निर्धारित जलाए जाने को सांस्कृतिक रूप से जलाए जाने के विरुद्ध नहीं है।
इसके बजाय, ध्यान बुशफ़ायर शमन और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य में सांस्कृतिक रूप से जलाए जाने की भूमिका के बारे में साक्ष्य और अंतर्दृष्टि साझा करने पर है - एक ऐसी भूमिका जिसे प्रथम राष्ट्र समुदाय सहस्राब्दियों से समझते आए हैं।
“हमारे पास, अग्नि प्रबंधन तकनीकों का यह टूलबॉक्स है। और हम लंबे समय से प्रथम राष्ट्र समुदाय के उन उपकरणों को अनदेखा कर रहे हैं जो हज़ारों वर्षों से इस देश की देखभाल कर रहे हैं।”
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