फ्लाइंग बैट्स फुटबॉल क्लब 40 से अधिक वर्षों से LGBTIQ+ महिलाओं और नॉन-बाइनरी लोगों के लिए एक सुरक्षित मंच रहा है। लेकिन, हाल के सालों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर बढ़ी बहस और सुर्खियों के बीच, इस क्लब की टीमों को भी गलत सूचनाओं और भ्रामक दावों का निशाना बनाया जा रहा है।
फ्लाइंग बैट्स फुटबॉल क्लब की स्थापना 1985 में सिडनी में दोस्तों के एक समूह ने की थी।
क्लब की संस्थापक सदस्यों में से एक एलिसन टॉड ने एसबीएस एग्ज़ामिन्स को बताया कि इस टीम की शुरुआत समुदाय को जोड़ने, दोस्ती बढ़ाने, बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और साथ मिलकर खेल का आनंद लेने के उद्देश्य से की गई थी।
"शुरुआत में टीम में ज्यादातर लेस्बियन महिलाएं शामिल थीं, लेकिन क्लब ने कभी खुद को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रखा। यहां हर किसी का हमेशा स्वागत किया गया।"Alison Todd, Founder, Flying Bats Football Club
आज यह क्लब LGBTIQ+ महिलाओं और नॉन-बाइनरी खिलाड़ियों का दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे लंबे समय से संचालित फुटबॉल क्लब बन चुका है।
क्लब की अध्यक्ष सैम लुईस का कहना है कि इस क्लब ने उन्हें ऐसा सुरक्षित और समावेशी माहौल दिया, जैसा बचपन में फुटबॉल खेलते समय उन्हें कभी नहीं मिला था।
बैट्स क्लब से जुड़ने के बाद मुझे पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि मैं बिना किसी डर या झिझक के खुद जैसी हूं, वैसी रह सकती हूं। पहले मुझे हमेशा यह डर रहता था कि लोग मुझे स्वीकार नहीं करेंगे, इसलिए अपनी पहचान का एक हिस्सा छिपाकर रखना पड़ता था। इस क्लब में ऐसा माहौल नहीं है ।सैम लुइस, अध्यक्ष, फ्लाइंग बैट्स फुटबॉल क्लब
हालांकि, टीम में ट्रांसजेंडर और जेंडर-डाइवर्स खिलाड़ियों को शामिल करने के कारण क्लब को लगातार आलोचना और विरोध का सामना करना पड़ा है।
सैम लुइस का कहना है कि यह विरोध ट्रांस महिलाओं को लेकर फैली गलतफहमियों, रूढ़िवादी धारणाओं और इस सोच से पैदा हुआ है कि वे खेल पर किस तरह असर डालती हैं।
उन्होंने कहा, "हमारी गतिविधियों पर नज़र रखी गई, हमारी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और कई मौकों पर विरोधी टीमों के खिलाड़ियों और कोचों ने हमारे खिलाफ ट्रांसफोबिक और होमोफोबिक टिप्पणियां कीं।"
सैम के मुताबिक, "यह सब गलत सूचनाओं का नतीजा है, जिसने लोगों के मन में हमारे बारे में गलत धारणाएं और पूर्वाग्रह पैदा कर दिए हैं।"
SBS Examines के इस सप्ताह के एपिसोड में जानिए एक ऐसी टीम की कहानी, जो सामुदायिक खेलों में समावेशिता और समानता की मिसाल पेश कर रही है।"
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