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ड्रग तस्करी से कूटनीति तक: पैसिफ़िक देश और लैटिन अमेरिका क्यों आ रहे हैं करीब?

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U.S. Coast Guard crews offload bales of seized cocaine from a semi-submersible suspected smuggling vessel in the Eastern Pacific Ocean.

अवैध मादक पदार्थों यानी ड्रग्स की तस्करी, कूटनीतिक सहयोग और मुक्त व्यापार की विचारधारा, पैसिफ़िक और लैटिन अमेरिकी देशों को एक-दूसरे के और करीब ला रही हैं।


Published

By Tavishek Sharma, Tuipoloa Evan Charlton

Presented by Vrishali Jain

Source: SBS



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अवैध मादक पदार्थों यानी ड्रग्स की तस्करी, कूटनीतिक सहयोग और मुक्त व्यापार की विचारधारा, पैसिफ़िक और लैटिन अमेरिकी देशों को एक-दूसरे के और करीब ला रही हैं।


प्रशांत क्षेत्र में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त की जा रही अवैध मादक पदार्थों की मात्रा अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

यह स्थिति कई प्रशांत यानी पैसिफ़िक देशों में लंबे समय से विकसित हो रही प्रक्रिया का परिणाम है। ये देश पहले केवल नशीले पदार्थों की तस्करी के रास्ते थे, लेकिन धीरे-धीरे वितरण केंद्र बने और अब खुद लाभदायक स्थानीय बाज़ारों में बदलते जा रहे हैं।

इस बढ़ते संकट के जवाब में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के सहयोग से कोलंबिया में एक विशेष जांच इकाई (Special Investigation Unit) स्थापित की गई है, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करना है।

लेकिन पैसिफ़िक आइलैंड्स फोरम के सदस्य देशों और लैटिन अमेरिका के बीच विकसित हो रहे संबंधों के पीछे केवल अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध ही एकमात्र कारण नहीं है।

अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया जैसे अपने साझेदार देशों से प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में अधिक ज़िम्मेदारी निभाने की उम्मीद करता है।
एना पौल्स, असोसिएट प्रोफेसर, मैसी यूनिवर्सिटी

रापा नुई (ईस्टर द्वीप) जैसे अपने पैसिफ़िक क्षेत्र के कारण, चिली 2021 में पैसिफ़िक आइलैंड्स फोरम का संवाद साझेदार बना। चार साल बाद, उसने दक्षिण प्रशांत रक्षा मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की, जिसमें फ़िजी, पापुआ न्यू गिनी और टोंगा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में क्षेत्र के सामने उभरती सुरक्षा चुनौतियों के रुझानों पर चर्चा हुई। साथ ही, चिली ने रापा नुई में एक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा।

हालांकि, जिन देशों के पैसिफ़िक क्षेत्र से ऐतिहासिक संबंध सीमित रहे हैं, उनकी बढ़ती दिलचस्पी इस क्षेत्र के लिए कूटनीतिक माहौल को और जटिल बना रही है।

ऐसी स्थिति में प्रशांत देशों को बाहरी शक्तियों की प्राथमिकताओं और अपनी स्वयं की आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है। दूसरे शब्दों में, वे एक ऐसे रास्ते की तलाश में हैं जो उनके राष्ट्रीय हितों और बाहरी दबावों, दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित कर सके।

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