सैनिक की वर्दी को अंग्रेज़ी में अक्सर ‘सेकंड स्किन’ कहा जाता है। यह वर्दी सिर्फ़ कपड़ा नहीं, बल्कि अभिमान, गौरव और अनुशासन की प्रतीक होती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब यह वर्दी इस स्थिति में नहीं रहती कि उसे पहना जा सके, तब उसका क्या होता है? स्वाभाविक है कि ऐसी वर्दी की विदाई भी उतनी ही सम्मानजनक होनी चाहिए। इसी सोच को साकार कर रहे हैं मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) आशिम कोहली। वे इन पुरानी वर्दियों को रीसायकल कर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के लिए बैग्स में बदल रहे हैं। इसके अलावा इन वर्दियों से मास्क, मोबाइल होल्डर जैसी अन्य उपयोगी वस्तुएँ भी बनाई जा रही हैं।
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