ऑस्ट्रेलिया में एजिंग और डिमेंशिया जैसे इश्यूज के साथ, ज्यादातर परिवार एजेड केयर सिस्टम का सहारा लेते हैं। लेकिन भारत और भारतीय परिप्रेक्ष्य में एजेड केयर सिस्टम इतना प्रचलित नहीं है। ज्यादातर बुजुर्ग घर पर ही परिवार के साथ रहते हैं और उनका ख्याल परिवार ही रखता है। मेलबर्न में रहने वाले गुडुरु राव, जिन्हें जी के नाम से भी जाना जाता है और उनकी पत्नी उमा राव की कहानी इसी बात का एक उदाहरण है। डिमेंशिया के साथ जी रहे गुडुरु यानी जी का ख्याल उनकी पत्नी उमा राव और पूरा परिवार घर पर रहकर रखता है, ऑस्ट्रेलिया के एजेड केयर सपोर्ट सिस्टम के तहत मिलने वाली होम बेस्ड सर्विसेज के साथ। एसबीए सिंधी पर मैं हूं नबील हसन। जी और उमा ने हाल ही में अपनी सिक्स्टीथ वेडिंग एनिवर्सरी का जश्न मनाया और इसी सेलिब्रेशन के दौरान हमने उमा राव, उनके बच्चों और जी के केयरर से भी बात की। साठ साल के इस विवाहित सफर के बारे में बात करते हुए उमा राव बताती हैं कि जी के साथ उनका यह रिश्ता और सफर उनके लिए क्या मायने रखता है?
इट मीन्स अ लॉट टू अस मेनली बिकॉज, जी वास वेरी सिक एंड ही वेंट टू हॉस्पिटल
फाइव इयर्स अगो एंड ही स्टेड इन हॉस्पिटल फॉर नीरली सिक्स मंथ्स। हॉस्पिटल वास चैलेंज मी टू सेंड हिम टू एज केयर। आई डिड नॉट वांट टू गो टू एज केयर, सो आई टूक अ चैलेंज फ्रॉम दें एंड आई ब्रॉट माय हस्बैंड होम एंड सिंस देन आई एम लुकिंग आफ्टर फुल टाइम। आई एम अलसो वर्किंग फुल टाइम एट दैट टाइम, बट आई हैव टू रिजाइन द जॉब टू इयर्स अगो एंड द रीजन फॉर दैट इज ही वास क्वाइट सिक एंड आई हैड अ वेरी सीनियर पोजीशन एट विक्टोरिया पुलिस। आई कुड नॉट गो टू बिग जॉब्स, सो आई लुक आफ्टर हिम एज़ ए केयरर ट्वेंटी फोर बाय सेवन।
उमा राव आगे बताती हैं कि एजेड केयर पैकेज के तहत जी को घर पर ही जरूरी सहायता मिल रही है, जिसमें एक प्रोफेशनल केयरर भी शामिल है।
एज केयर इज गुड टू अस सो आई हैव ए केयरर फॉर हिम फॉर टू डेज, जी गेट्स ऑक्सीजन, जी गेट्स गार्डनिंग, जी गेट्स
कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर।
एजेड केयर के नए पैकेजेस में आए बदलावों पर बात करते हुए उमा राव का कहना है कि मल्टीपल हेल्थ इश्यूज के साथ जी रहे मरीजों के लिए लगातार मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है और इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
द बिग चेंज आर सी नाउ इन पैकेज, दे रिमूवड कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग ग्लूकोज, जी गॉट मल्टीपल हेल्थ इश्यूज, ही इज़ गॉट डिमेंशिया नाउ, किडनी इश्यू, लंग्स इश्यू एंड हार्ट इश्यू। अ पर्सन लाइक दैट हू इज सिक। दे आर नॉट गोइंग टू गिव कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग एंड नॉट थिंकिंग ऑफ राइटिंग टू द गवर्नमेंट बिकॉज, ही इज क्लासिफाइड एज़ अ डायबिटीज टू डायबिटीज टाइप वन गेट्स इट बट नॉट डायबिटीज टाइप टू गेट्स इट। ही कैन टेल मी इफ इज इन हाइपो एंड आई एम प्रिकिंग हिज फिंगर्स सिक्स और एट टाइम्स इन अ डे टू सी हाउ हिज़ शुगर इज। अदरवाइज, आई एम हैप्पी विद द ओल्ड सिस्टम, बट आई हैव नॉट ट्राइड द न्यू सिस्टम येट, बट आई नोटिस वन बिग चेंज।
डिमेंशिया के बढ़ते केसेस को देखते हुए उमा राव यह भी कहती हैं कि सरकार के साथ साथ समुदाय को भी इस दिशा में और कदम उठाने की जरूरत है।
टू फिफ्टी पीपल, ईच दे आर गेटिंग डिमेंशिया इन ऑस्ट्रेलिया एंड वी नीड टू लॉबी, ऑस्ट्रेलियन गवर्नमेंट टू डू लॉट मोर वर्क इन दैट एरिया टू टेल एवरीवन। व्हाट इज इट और हाउ यू कैन लुक आफ्टर दें, हाउ द कम्युनिटी कैन बी हेल्पफुल। दैट इज वेरी वेरी इंपॉर्टेंट एंड रीसेंट स्टेटिस्टिक्स फ्रॉम ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स सेज़ डिमेंशिया एंड अल्जाइमर इज़ द हाईएस्ट डेथ नाउ, सुपरसीडिंग, हार्ट अटैक्स एंड अदर्स। सो दिस इज ए सोशल प्रॉब्लम फॉर ऑस्ट्रेलियन गवर्नमेंट टू हैंडल।
जी को एजेड केयर में भेजने के बजाय घर पर रहकर ख्याल रखने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिवार के साथ ने इस फैसले को लेने में हिम्मत दी।
इट वास क्वाइट डिफिकल्ट डिसीजन। आई मेड फैमिली अलसो फेल्ट दैट वी शुड ब्रिंगिंग होम एंड डॉक्टर्स डिडंट। आई हैव अ कपल ऑफ नेफ्यूज हु सेड ब्रिंगिंग होम बिकॉज। इट विल बी गुड एनवायरनमेंट फॉर हिम एंड ही डिड नॉट नो एनीथिंग व्हाट वाज हैपनिंग। सो आई कैन टेल हिज व्यूज। इट्स लिटिल फ्रस्ट्रेटिंग, बट आई एम हैप्पी दैट आब्रॉड एंड लुकिंग आफ्टर फॉर लास्ट फाइव इयर्स।
डिमेंशिया से जूझ रहे परिवारों के लिए संदेश देते हुए उमा यह सलाह देती हैं कि डिमेंशिया ऑस्ट्रेलिया जैसा ऑर्गनाइजेशन से मदद जरूर लेनी चाहिए। उनका कहना है कि शुरुआती कुछ महीनों में मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन समय के साथ साथ चीजें धीरे धीरे संभल जाती हैं।
फैमिलीज विद पीपल, विद डिमेंशिया, आर रिकमेंड स्ट्रांग दैट सीक हेल्प। हेल्प इज रियली एक्सेप्शनली गुड हियर फ्रॉम डिमेंशिया ऑस्ट्रेलिया। दे विल हेल्प यू पुट यू थ्रू लॉट ऑफ डिफरेंट ऑर्गनाइजेशन्स हु कैन हेल्प अस। देर इज ए एफटीटी नेटवर्क ग्रुप डन बाय डिमेंशिया ऑस्ट्रेलिया, दैट इज वेरी वेरी यूजफुल एंड यू कैन सिट, मीट पीपल इन फॉर्म ऑफ वे एंड चैट एंड शेयर योर इश्यूज। सो आई सजेस्ट टू ज्वाइन दैट टू द अदर पीपल हु आर फेसिंग सिमिलर सिचुएशन। इट इज डिफिकल्ट फर्स्ट फ्यू मंथ्स टू एक्सेप्ट। वंस यू एक्सेप्ट, यू नो दैट दिस इज योर नॉर्म नाउ, यू हैव डिफरेंट नॉर्म। यू हैव टू लिव विद दैट एंड यू मेक पर्सन हु इज सफरिंग, विद डिमेंशिया एज़ मच एज़ कंफर्टेबल एज़ पॉसिबल।
इसके बाद हमने जी की केयर मेडलीन ब्रोलिया से भी बात की। मेडलीन बताती हैं कि घर पर केयर और सपोर्ट मिलना मरीज और परिवार दोनों के लिए काफी मददगार होता है। हालांकि वेटिंग लिस्ट जैसे कुछ इश्यूज हैं, जिन पर सरकार को गौर करना होगा।
इट मेक्स अ बिग डिफरेंस टू सो मेनी पीपल, कीपिंग दें इन द होम्स रादर देन शिपिंग द मफ और पुटिंग दम इंटू केयर इन नर्सिंग होम, वेयर यू हैव टू पे अक्मोडेशन, डिपॉजिट फंड व्हिच कैन बी ह्यूज, द इक्विवेलेंट ऑफ समवन हाउस। इट मेक्स इट रियली डिफिकल्ट। सो कीपिंग पीपल इन द होम्स इज फैंटास्टिक। आई थिंक वेटिंग लिस्ट और वेट टाइम्स, परहैप्स आर बिट ऑफ इश्यू, बट द ऑस्ट्रेलियन गवर्नमेंट सीम्स टू बी ट्राइंग रोल आउट एज़ मेनी पैकेजेस एज़ पॉसिबली कैन।... From my own experience, I feel like the organisations that are taking on the clients, they don't have enough staff, so they're not able to cope with all of the perhaps the administrative side of things in perhaps a timely manner. But the organisations are good, the support is there. People are getting services and support in their homes rather than having to leave their homes, which is fantastic.
मैरिलिन यह भी कहती हैं कि किसी फैसिलिटी में रहने के मुकाबले परिवार के बीच रहकर सपोर्ट और केयर पाना एक अलग अनुभव है और उनके लिए यह सिर्फ एक जॉब नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है।
एटलीस्ट इन योर होम, यू कैन बी गारंटीड दैट यू हैव गॉट पीपल हु आर जेनुइनली वांटिंग टू बी दियर टू केयर फॉर यू। दे हैव द हार्ट एंड लव इंवोल्व्ड रादर देन perhaps इन अनदर फैसिलिटी वेयर पीपल इट्स यस, इट्स अ जॉब फॉर मी वर्किंग ए्स ए कैर इन समबडी होम। आई टेक द रिस्पांसिबिलिटी वेरी हाईली और वेरी हेविली। आई एम दियर टू फैसिलिटेट व्हाट दे नीडड एंड टेक द स्ट्रेस एंड प्रेशर ऑफ फ्रॉम द जनरल ट्वेंटी फोर आवर कंटीन्यूल केयर इट्स एग्जॉस्टिंग। अदरवाइज इट इज इट इज।
सिक्सथ वेडिंग एनिवर्सरी के इस उत्सव पर हमने गुडूरू यानी जी और उमा राव के बच्चों से भी बात की। आलोक राव का कहना है कि किसी भी बेटे के लिए डिमेंशिया से जूझ रहे पिता के साथ डील करना मुश्किल जरूर होता है, लेकिन इस प्रोसेस में एक अलग ही रिश्ता भी बन जाता है।
इट इज ए लिटिल बिट टफ फॉर किड्स टू डील विद ए पेरेंट विद डिमेंशिया, बिकॉज यू नो, ऑल योर लाइफ, बट यू हैव टू थिंक अबाउट द अदर थिंग्स ही नाउ प्रोवाइड्स। वी स्टिल कम्युनिकेट अ लॉट, इवन थॉ उ नॉन वर्बल थ्रू हैंड जेस्चर्स फॉर लाफिंग। ही लव्स प्लेइंग तबला। ही लव्स ओल्ड हिंदी फिल्म और थिंग्स दैट ही नेवर शेयर द विथ मी बिफोर डिमेंशिया। बट आफ्टर डिमेंशिया,共享 तो शेयर सम ऑफ हिं्स इंटरेस्ट विथ मी, आई रियली अप्रिशिएट इट।
दूसरे बेटे अशोक राव बताते हैं कि ऑस्ट्रेलियन कल्चर में फुल टाइम नौकरी के साथ मां बाप का ख्याल रखना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो सकता है। शायद इसीलिए एजेड के सपोर्ट का सहारा लिया जाता है। लेकिन उन्हें कभी भी यह ख्याल नहीं आया कि उनके पिता उनसे अलग रहेंगे।
आई नेवर रियली लुक एट माय पेरेंट्स गोइंग टू एजेड। आई जस्ट डोंट नो, मेबी इट्स अ कल्चरल थिंग एंड आई ग्रो अप इन ऑस्ट्रेलिया। आई हैव ऑलवेज फेल्ट दैट दे वुड स्टे विद अस और द फैमिली एंड डोंट रियली लाइक दम स्टेइंग बाय दमसेल्व्स और एटलीस्ट माय सिस्टर्स दियर एंड आई विल स्टे विद अस। बट आई कैन सी व्हाई पीपल पुट एजेड केयर एंड इट्स लॉट हार्ड फॉर पीपल। पीपल आर वर्किंग फुल टाइम चिल्ड्रेन। दर्स लॉट्स ऑफ एक्टिविटीज। वेरी हार्ड टू टेक केयर ऑफ पेरेंट्स आफ्टर अ सर्टेन एज। सो आई डू सी इट एज़ अ डिफरेंस दियर, बट आई थिंक आई एम स्टिल काइंड ऑफ थिंकिंग इन इंडिया। द वे ऑफ द फैमिली गोइंग एंड हेल्पिंग एजेड पेरेंट्स इज आई स्टिल द बेस्ट वन। इट्स नॉट वेल डिस्कस टॉपिक इन इंडियन कम्युनिटी, इमेजिन बोथ इन इंडिया एंड ऑस्ट्रेलिया सो। बट आई थिंक एवेंचुअली पीपल स्टार्ट लर्निंग अबाउट इट्स मोर इश्यू, पीपल अंडरस्टैंड व्हाट इट इज एंड होपफुली, द एजुकेशन प्रोसेस। बट आई थिंक द लर्निंगिंग आई हैव इज जस्ट बीइंग पेशेंट एंड रियली लर्निंगिंग अबाउट द इश्यू।
अंत में जी और उमा राव की बेटी अनुजा राव बताती हैं कि डिमेंशिया के बाद वह अपने पिता के और करीब आ गई हैं। डांस, म्यूजिक, गेम्स और साथ में कई सारी एक्टिविटीज करना उनके रिश्ते का एक खूबसूरत हिस्सा बन गया है।
इन फैक्ट बिकम अ बिट क्लोजर टू माय पेरेंट्स, पर्टिकुलरली माय डैड। वाइल हीज गॉट डिमेंशिया, आई गिविंग लॉट्स ऑफ कडल, सो ही रिमेम्बर्स मी। ही लाइक टू प्ले द बोंगो ड्रम्स और तबला। आई डांस विद हिम। सो दैट कीप्स द रिलेशनशिप अलाइव एंड मेमोरीज अलाइव फॉर हिम।
अनुजा राव यह भी कहती हैं कि कैरर्स का रोल बेहद जरूरी होता है। ना सिर्फ मरीज के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए, जिससे काम और स्ट्रेस दोनों कम हो जाते हैं।
आई वुड इनकरेज यू टू एंब्रेस ए कैरर टू हेल्प विद रिलीविंग सम ऑफ द स्ट्रेस दैट कैन बिल्ड अप इन ए डिमेंशिया रिलेशनशिप। द कैर इज सो इंपॉर्टेंट, एक्चुअली नॉट ओनली टू लुक आफ्टर द पर्सन विद डिमेंशिया, बट ऑल्सो गिव रिलीफ टू द वाइफ इन डूइंग सम ऑफ द मंडेन एक्टिविटीज, हाउसहोल्ड एक्टिविटीज।
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