Here's what changed in Australia's migration policy in 2025 and what to expect in 2026

Australian visa and immigration changes in 2025 and 2026

Australia enters 2026 with an unchanged migration cap, tighter skilled priorities, more student places and reforms triggered by the Bondi attack, but experts say issues remain. (Representative image) Source: Bloomberg / Indranil Aditya/Bloomberg via Getty Images

Australia’s 2026 migration plan introduces major changes, with the permanent migration intake set at 185,000 visas and international student visa numbers increasing to 295,000. The government is also implementing stricter student visa screening for applicants from India, Nepal, Bhutan, and Bangladesh, citing a rise in fraudulent visa applications. In conversation with registered migration agent Vaibhav Patel, we break down changes made to Australia’s immigration policy in 2025 and discuss what migrants and international students can expect in 2026.


[Disclaimer: This information is intended as a general guide and is accurate as of the date of publication. Migration laws and policies may change over time. For advice tailored to your situation, please consult a qualified migration or legal professional.]

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[म्यूज़िक] नमस्कार, एसबीएस हिंदी पर मैं हूं स्वाति शर्मा। दो हज़ार पच्चीस में ऑस्ट्रेलिया की इमीग्रेशन पॉलिसी में कई बड़े बदलाव किए गए और आज इस अंश में हम जानेंगे कि क्या थे ये बदलाव। साथ ही हम बात करेंगे रजिस्टर्ड माइग्रेशन एजेंट वैभव पटेल से, जो इन बदलावों को समझने में हमारी मदद करेंगे। सबसे पहली और शायद सबसे अहम बात, परमानेंट माइग्रेशन प्रोग्राम में कोई कटौती नहीं हुई है। साल दो हज़ार पच्चीस-छब्बीस में भी 1,85,000 परमानेंट वीजा दिए जाएंगे, बिल्कुल पिछले साल की तरह। इन 1,85,000 वीजा में से 1,32,200 वीजा स्किल माइग्रेशन के लिए हैं, यानी करीब 71 फीसदी। बाकी 52,500 वीजा फैमिली स्ट्रीम के लिए, जिसमें ज्यादातर पार्टनर वीजा होते हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और कामगारों की कमी को पूरा करने के लिए लिया गया है, खास तौर पर रीजनल यानी ग्रामीण इलाकों में, जहां काम करने वालों की बहुत जरूरत है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। असल सवाल यह है कि जो लोग आते हैं, क्या उनकी स्किल्स का इस्तेमाल सही तरीके से हो रहा है या नहीं? क्या वो अपनी योग्यता के हिसाब से काम पा सकते हैं या नहीं? और क्या इसका कोई हल है? इस पर वैभव का कहना है-

...इवन दो वो पीआर लेट्स से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर लेते हैं या टीचर के तौर पर लेते हैं, लेकिन वो काम नहीं करते। तो इसमें सरकार यह चीज कर सकती है कि उन लोगों को पीआर थोड़ा ज्यादा ईजीली दे, जो अपने फील्ड में ऑलरेडी काम कर रहे हैं। तो उससे क्या होगा कि लोग ज्यादा मोटिवेट होंगे अपने फील्ड में जॉब ढूंढने के लिए और साथ-साथ में सरकार को ज्यादा ऑप्शंस भी देने चाहिए, इन टर्म्स ऑफ ऑक्यूपेशंस और उन चीजों में। जैसे अभी रिसेंटली उन्होंने जो रूल्स चेंज किए थे, जैसे रिटेल मैनेजर है, पहले पेट्रोल स्टेशन पर मैनेजर या एंग्री जैक्स का मैनेजर या मैकडी या कोई भी फास्ट फूड चेन में मैनेजर स्पॉन्सर नहीं हो सकते थे। अभी उन्होंने रिसेंटली लास्ट ईयर जब उन्होंने रूल चेंज किया, तो उसमें वो ऑक्यूपेशन डाला हुआ है। तो उससे बहुत सारे लोग जो उस फील्ड में काम कर रहे थे, अभी वहीं पर स्पॉन्सरशिप ले रहे हैं, उसी में स्किल माइग्रेशन ले रहे हैं और उसी में काम कर रहे हैं। जो रीजनल एरिया के अंदर एंप्लॉयमेंट ही नहीं है, तो स्टूडेंट्स या जो भी नए लोग ऑस्ट्रेलिया में माइग्रेट हो रहे हैं, टेंपररी है, परमानेंट वीजा पे, तो वो लोग वहां पे मोटिवेट नहीं होते कि भाई मैं वहां पे जाकर काम करूं। और दूसरी चीज है कि वहां पे उन्होंने ऑप्शंस ऐसे देने पड़ेंगे, जिसमें उनके पास परमानेंट रेजिडेंसी के ऑप्शंस ज्यादा हों। तो अगेन क्योंकि उनको पीआर मिल रहा है, तो लोग ज्यादा रीजनल में जाना प्रेफर करेंगे। अगर और उसमें भी लॉन्ग टर्म ऑप्शन हो, जैसे अभी 491 वीजा है, वैसे कोई ऑप्शंस रखेंगे तो ज्यादा और भी लोग मोटिवेट होंगे रीजनल में जाने के लिए।

अब बात करते हैं अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की। पिछले दो साल से सरकार स्टूडेंट वीजा पर काफी सख्ती कर रही थी, लेकिन अब 2026 में थोड़ा नरम रुख अपनाया जा रहा है। 2025 में स्टूडेंट टेक 2,70,000 था, अब 26 में इसे बढ़ाकर 2,95,000 कर दिया गया है। यानी 25,000 ज्यादा जगहें बनाई गई हैं। अच्छी खबर यह है कि अगर आप ऑस्ट्रेलिया में ही स्कूल में पढ़े हैं या फिर टेफ से किसी पब्लिक यूनिवर्सिटी में जा रहे हैं, तो आप पर यह कैप लागू नहीं होगी। 2024-25 में करीब 4,27,000 स्टूडेंट वीजा एप्लीकेशन आए, जो पिछले साल के 6 लाख से काफी कम हैं। वीजा रिफ्यूजल रेट करीब 18 फीसदी रहा और अब सरकार ने फर्जी कागजों और आवेदनों से निपटने के लिए भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से आने वाले स्टूडेंट वीजा एप्लीकेशन्स पर सख्ती दिखाने का फैसला लिया है। इन देशों के छात्रों को ऑस्ट्रेलिया में स्टडी वीजा के लिए आवेदन करते समय अब कड़ी जांच और अधिक दस्तावेजी आवश्यकताओं का सामना करना पड़ेगा। इस बारे में वैभव कहते हैं-

इसमें कई स्टूडेंट्स क्या करते हैं, वो बहुत डेयरिंग कर लेते हैं कि उनके एजेंट ज्यादातर डेयरिंग करते हैं कि वो उनको फेक डिग्रिस बनाकर देते हैं, जिसके बेस पे उनका आगे का यहां पे एडमिशन ईजी हो जाए और वीजा ग्रांट ईजीली आ जाए।

हम्म!

तो ये सब चीजों में नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि दो रीजन है। एक तो यहां पे आकर भी अभी क्योंकि टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस है, गवर्नमेंट ईजीली पकड़ लेगी आपको और अपना आप अपना इतना, इतना सारा पैसा इसमें इन्वेस्ट कर रहे हो। क्योंकि जब एजेंट ऑफशोर से ऐसी चीजों में इंवॉल्व होते हैं, तो वो लोग ऑब्वियसली आपसे पैसे भी ज्यादा ही ले रहे होंगे।

हम्म।

तो इन चीजों में नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि आप अपना पैसा और अपना फ्यूचर भी रिस्क पे डाल रहे हो और साथ-साथ में अपनी कंट्री का नाम भी खराब कर रहे हो, तो दोनों नहीं करना चाहिए।

अब बात करते हैं नेट ओवरसीज माइग्रेशन की, यानी कितने लोग ऑस्ट्रेलिया आए और कितने गए। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के अनुसार, 2024-25 में नेट ओवरसीज माइग्रेशन घटकर 3,06,000 हो गया। यह तीन साल का सबसे कम आंकड़ा है। याद रखिए, कोविड के बाद 2022-23 में यह 5,38,000 तक पहुंच गया था। यह गिरावट दो कारणों से आई। एक तो आने वालों की संख्या में 14 फीसदी की कमी और जाने वालों की संख्या में 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सरकार चाहती है कि यह संख्या और कम हो, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि परमानेंट वीजा में कटौती करने से नेट माइग्रेशन कम नहीं होगा, क्योंकि ज्यादातर परमानेंट वीजा अप्लाई करने वाले लोग पहले से ही ऑस्ट्रेलिया में हैं। दिसंबर 2025 में बॉन्डाई बीच पर हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने माइग्रेशन कानूनों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। होम अफेयर्स मिनिस्टर टोनी बर्क ने कहा कि सरकार वीजा रद्द करना और वीजा देने से इनकार करना आसान बनाएगी। असिस्टेंट इमिग्रेशन मिनिस्टर मैट थिसलबेट ने कहा कि जिन लोगों के विचार नस्लवादी हैं, जो यहूदी विरोधी हैं या जो हिंसा भड़का सकते हैं, उन्हें ऑस्ट्रेलिया नहीं आने दिया जाएगा। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ये नए कानून किसी एक विशिष्ट पृष्ठभूमि के लोगों को असमान रूप से प्रभावित कर सकते हैं। मेलबर्न यूनिवर्सिटी की क्रिमिनोलॉजी लेक्चरर क्लेयर लॉफनन ने कहा कि इससे एक पूरे समुदाय पर संदेह की नजर पड़ सकती है। कुछ अच्छी खबरें भी हैं। सरकार ने स्टेटस रेजोल्यूशन सर्विस यानी एसआरओ को अब ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दिया है। अगर आपका वीजा एक्सपायर हो गया है, तो यह सर्विस आपको जल्दी से जल्दी अपनी स्थिति ठीक करने में मदद करती है। आप दोबारा वीजा के लिए अप्लाई कर सकते हैं या देश छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। वहीं, इंग्लिश लैंग्वेज टेस्ट की लिस्ट भी अपडेट की गई है। पहले सिर्फ पांच टेस्ट मान्य थे, अब नौ टेस्ट स्वीकार किए जाते हैं। इससे आवेदकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। इमी ऐप में भी सुधार किए गए हैं। अब 34 देशों में लोग इस ऐप से अपना बायोमेट्रिक डेटा और पासपोर्ट की जानकारी अपने स्मार्टफोन से ही सबमिट कर सकते हैं। उन्हें बायोमेट्रिक सेंटर जाने की जरूरत नहीं है। तो ये तो थे साल 2025 में ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन नियमों में किए गए मुख्य बदलाव। पर क्या 2026 में भी कुछ नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं? वैभव बताते हैं।

बहुत सारे बदलाव एक्सपेक्टेड है कि होंगे। एक तो है कि ऑक्यूपेशन लिस्ट बढ़े और उसमें भी स्पॉन्सर, स्पॉन्सरशिप के लिए ज्यादा ऑप्शंस बनेंगे शायद।

जी।

और स्किल वीजा के लिए जो उनको अ... जो पॉइंट टेस्ट है, स्किल वीजा की, उसमें शायद चेंजस देखने को मिले, आपको मेजर चेंजस देखने को मिलें।

जी।

ये दो चेंजस मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा आपको शायद इस साल में देखने को मिलेंगे और वो अच्छे भी हैं।

एसबीएस हिंदी पर आपके लिए इस अंश को लेकर आई स्वाति शर्मा। धन्यवाद।

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