-[intro music]
-नमस्कार दोस्तों, आप जुड़े हुए
हैं भव्या पांडे के साथ और आज हम बात करेंगे
बाउल कैंसर की। आपको बता दूं कि कैंसर
काउन्सिल विक्टोरिया ने हाल ही में हिंदी भाषी
समुदाय में बाउल कैंसर यानी आंत के
कैंसर की स्क्रीनिंग की जागरूकता बढ़ाने के
लिए एक अभियान चालू किया है। यह अभियान
इसलिए चालू किया गया है क्योंकि इस समुदाय
में अन्य भाषा के समुदायों की तुलना में
जागरूकता काफी कम है। इस अभियान और बाउल
कैंसर से जुड़े कई सवालों का जवाब लेकर
हमारे साथ जुड़ी हैं जनरल प्रैक्टिशनर
पल्लवी शर्मा।
बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके हिंदी भाषी समुदाय
और समुदाय और सभी लोगों को मेरा नमस्कार।
तो पल्लवी जी अभी कैंसर काउन्सिल विक्टोरिया
की तरफ से जो नया कैम्पेन लॉन्च हुआ है,
मैं चाहूंगी कि आप हमारे श्रोताओं को उसके
बारे में कुछ बताएं।
आपको सबसे पहले बहुत-बहुत धन्यवाद इस बात
को,
लोगों को अंकित करने के लिए कि इस समय आंत
कैंसर की जो
संख्या है, हिंदी भाषी खासकर हिंदी भाषी
समुदाय में 45 से 74 वर्ष के बीच में
देखा जा रहा है कि अक्सर लोग जो आंत्र
स्क्रीनिंग किट दिया जाता है, हर दूसरे
साल मेल में पहुंचता है और जिससे हम जल्द
से जल्द बाउल कैंसर या
आंत्र कैंसर की जांच करके पता लगा सकते हैं
और कहीं अक्सर
अर्ली स्टेजेस में जो कहते हैं,
उस चरण में पता लगाने से उसका विधिपूर्वक
उसका समाधान करके लोगों को कैंसर मुक्त रख
सकते हैं। तो हम देख रहे हैं कि हमारे
हिंदी भाषी समुदाय इस कैंसर जांच की अपने
स्वास्थ्य के लिए जो फायदा उठाना चाहिए,
नहीं उठा पा रहे हैं। इसीलिए एज़ अ जीपी मैं
अपने पेशेंट्स में ट्राई कर रही हूं, और हर
डॉक्टर भी यही सोचते हैं कि हम खासकर
के 45 से 74 वर्ष के लोगों को इस खतरे के
बारे में अवगत कराएं।
जी, पल्लवी जी जैसा कि आपने एक किट के बारे
में बताया तो यह जो किट है यह किस तरह से
हमें प्राप्त हो सकती है और यदि यह mail में
नहीं आती है तो किस तरह से यह जो प्रक्रिया
है इसमें कोई आगे बढ़ सकता है यदि उसको
अपना टेस्ट कराना है?
पहली बात तो जो लोग परमानेंट रेजिडेंट हैं
ऑस्ट्रेलिया में उनको अपनी मेल में
फ्री किट मिलता है। हर दो साल में भेजा जाता है
तो आप बजाय उसको कोने में रखने
से उसको पढ़ें और बड़ा सरल तरीका है उसमें
सारे इंस्ट्रक्शंस दिए हैं और उस किट को
इस्तेमाल करके टेस्ट करके आप अपने मेल में
उसको भेज दीजिए। आपको कहीं और घर से बाहर
जाने की जरूरत नहीं है तो वह तो मुफ्त जांच
का किट आपको मिलता है और जो 45 से
50 तक वर्ष के लोग हैं उन्हें
cancer.vic.org.au के द्वारा
वह आर्डर कर सकते हैं यह मुफ्त किट और उसको
हम अपने घर पर ही करके उसे मेल आर्डर से
भेज सकते हैं। तो यह किट बहुत,
इतना सरल तरीके से उसमें सारे,
सारे इंस्ट्रक्शंस दिए रहते हैं और खुद
इंसान कर सकता है। इससे
90% से अधिक मामलों में शुरुआती चरण में
इसका
सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है यदि अगर
पता लग जाए तो।
पल्लवी जी यदि इस किट को यूज़ करने के बाद जो
रिज़ल्ट है वह पॉज़िटिव आता है तो आगे क्या
होगा और क्या पॉज़िटिव रिज़ल्ट का मतलब
कैंसर ही होता है? यानी यह जो किट है यह
-कितना सटीक है?
-यह भी एक
मिथ है, अक्सर लोग इस बात से डर जाते हैं कि
अगर हम किट में यह टेस्ट करेंगे, आंत्र जांच
की किट करेंगे, कहीं टेस्ट पॉज़िटिव आ गया तो
हमें जरूरी कैंसर होगा। यह भी बहुत गलत
धारणा है। अक्सर कई भी बाकी कारण भी होते
हैं। किट में अगर टेस्ट पॉज़िटिव आ जाए, हो
सकता है किसी को बवासीर हो, हो सकता है
किसी को पोलिप या कोई छोटी मोटी ग्रोथ जैसी
हो तो वो निकाल कर हमेशा के लिए प्रॉब्लम
solve कर दी जा सकती है। हर एक को कैंसर
होना जरूरी नहीं है क्योंकि अगर यह टेस्ट
बताता भी है, इस टेस्ट के पॉज़िटिव अगर आ भी
जाता है तो आपको अपने जीपी से संपर्क करके
स्पेशलिस्ट द्वारा एक आंत्र जांच की एक
दूरबीन का टेस्ट कराने से आगे पता चल जाएगा
कि यह कैंसर है या कुछ और भी चीज है। हर
मामले में आंत्र का कैंसर होना जरूरी नहीं
है लेकिन कम से कम जल्दी से जल्दी इसका
-सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
-मैं पूछना चाहूंगी कि कई लोगों को लगता है कि जो
डिसऑर्डर होता है तो यदि किसी के परिवार में
कैंसर नहीं है तब भी क्या यह जो टेस्ट है
-यह करवाना महत्वपूर्ण है?
-यही इस टेस्ट की असली चीज है कि इस टेस्ट से
भले आपके परिवार में किसी को कैंसर हुआ न
हुआ हो आंत्र का, आप भले स्वस्थ,
स्वास्थ्य है आपका और ऊपर से आपके पास कोई
लक्षण संकेत नहीं है। भले आपकी
संतुलित आहार और रोज व्यायाम के द्वारा आप
अपनी मेंटेन करते हैं। इसके बावजूद
भी अक्सर आपको बाउल कैंसर हो सकता है।
इसलिए आंत्र जांच कराना बहुत
-जरूरी है।
-पल्लवी जी आज आपका SBS हिंदी के साथ जुड़ने
के लिए और इस संदर्भ में हमें और जानकारी
देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।
आपका और आपके श्रोताओं को बहुत-बहुत मेरा
नमस्कार और धन्यवाद।
एसबीएस न्यूज़ के लिए इस खबर को आप तक एसबीएस हिंदी
में लेकर आई भव्या पांडे।
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