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Fuel shortages push two states to free public transport. Indian Australian community reacts

(L-R) Ajit Ramdas, Samreen Tabassum, Ritu Menon and Saleha Singh are residents from Tasmania and Victoria. They share how the state government announcements have impacted them, and how war in the Middle East is fuelling bigger uncertainties. Credit: AAP/Supplied
As the conflict in Middle East deepens the risk of a fuel crisis in Australia, two state governments, Tasmania and Victoria, have announced free public transport for stipulated time to bring down cost of living pressure. Residents in both states spoke to SBS Hindi, sharing how these decisions impact their daily budget, and how the Middle Eastern tensions have given rise to some bigger concerns and financial uncertainties in Australians.
[intro music]
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका
है। ऐसे में इस संघर्ष ने एक वैश्विक तेल संकट को जन्म दे दिया है। इसका असर अब
ऑस्ट्रेलिया में भी दिखने लगा है। जगह-जगह पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी और तेजी से
बढ़ते तेल के दामों के बीच देश के दो राज्यों ने सार्वजनिक परिवहन को कुछ समय के
लिए मुफ्त करने की घोषणा की है। विक्टोरिया में आगामी 31 मार्च से अप्रैल भर तक जहां
ट्रैम और बसें मुफ्त चलाई जाएंगी, वहीं तस्मानिया में 30 मार्च से 1जुलाई तक बसें
और फेरी को मुफ्त कर दिया गया है। विक्टोरिया में इस पूरे माह भीड़ और
धक्कामुक्की से बचने के लिए टैप ऑन करना आवश्यक अब नहीं रहेगा। गेट खुले
रहेंगे। मेलबर्न में रहने वाली सलेहा सिंह लंबे समय से सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करती
आ रही हैं। वे बताती हैं कि COVID के पहले वे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल दो या तीन
हफ्ते में एक बार करती थीं। लेकिन महामारी के बाद अब यह हफ्ते में दो-तीन बार हो गया
-है। -office मेरा CBD में है
और पार्किंग तो मिलती नहीं है, इसीलिए ट्रेन लेती हूँ मैं। अभी भी हफ्ते में एक दिन तो
जाती ही हूं। कभी-कभी दो दिन हो जाते हैं, कभी-कभी तीन दिन हो जाते हैं।
वे कहती हैं कि यह घोषणा उनके लिए काफी मायने रखती है।
बहुत, बहुत, बहुत फर्क पड़ेगा। एक तो पैसा बच जाएगी। मेरे लिए ऑफिस जाना जरूरी होता
है और जब मेरा pro bono काम सिटी में होता है, तब तो मैं बहुत जाती हूँ और मेरे लिए
बहुत पैसा बच जाएगा। और आज के दिन जब पेट्रोल क्या शायद दो डॉलर से ज्यादा है, ना पैसा
बचाऊंगी क्योंकि
-हर हफ्ते मुझे फिर पेट्रोल नहीं भरवाना। -तस्मानिया से रितु मेनन रोज़ पब्लिक
ट्रांसपोर्ट लेती हैं। वे बताती हैं कि तस्मानियाई सरकार के इस फैसले से उनके
-बजट पर काफी असर पड़ेगा। -मैं आज सुबह उठी तो मैंने न्यूज़ देखा तो मुझे
लगा बहुत ही लाइक अच्छा मूव है ताकि लोग को promote कर सके कि नहीं अब अपना गाड़ी ना
use करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट ज्यादा यूज़ करना। वो भी सही है, फ्री किया है तो लाइक
प्रोमोट करना अच्छी बात है क्योंकि अभी वैसे भी मेनलैंड में तो कमी हो ही गया है तो
इट्स गुड. मैं रोज बस ही लेती हूं। सुबह मेरे पास गाड़ी है लेकिन वहाँ जाकर
पार्किंग का वो सब प्रॉब्लम की वजह से मैं वही लेती। Like वही है कि थोड़ा और फ्रीक्वेंसी
बढ़ जाए बस का तो ज्यादा अच्छा रहेगा
क्योंकि वेट करना पड़ता है like half an hour में रहता है। But स्टिल यहाँ पे
मेनलैंड के comparison में बहुत कम पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज़ होता है ऐसा मुझे लगा है। हो
सकता है ये
इसकी वजह से वो बढ़ जाए और-- नहीं वैसे पहले तो जब petrol का rate देखा जाए, मेरा EV
कार है। पेट्रोलl मेरा... जितना मेरा ट्रांसपोर्ट का रेट था उतना ही था मेरा पेट्रोल अगर
मुझे ऑफिस तक जाने का था तो। बट अब वो एकदम फ्री हो गया है तो इट्स गुड.
समरीन तबस्सुम मेलबर्न में रहने वाली एक IT professional हैं। वे बताती हैं कि हालांकि
सरकार से मिली यह छूट उनके लिए तो तोहफा है, लेकिन शायद सबके लिए ना हो।
पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का फ्री होना एक महीने के लिए एडवांटेज तो है, लेकिन at the
same time उन लोगों के लिए जो पब्लिक, ट्रान्स्पोेर्ट ले नहीं सकते, क्योंकि कुछ
लोगों को on-site role होता है, उनको दूसरे लोकेशन पर भी जाना होता है। कभी-कभी
जो है वो पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का ऐसा होता है कि अगर disruption चल रही है तो
प्राइवेट मतलब जो own vehicle है वो यूज़फुल होता है। लेकिन at the same time फ्री करना
जो मेरे जैसे लोगों के लिए जो पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन रोज लेते हैं, उन पर डिपेंड
-करते हैं, उनके लिए benefit sure है। -समरीन हफ्ते के पांच दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट
लेती हैं। वे बताती हैं कि हफ्ते में उनको करीब 50 डॉलर तक का खर्चा सार्वजनिक
परिवहन पर आता है, जो कि अब एक budget होगा। कुछ इस तरह का ही कहना होबार्ट निवासी अजीत
रामदास का है। अजीत जी लंबे समय से रोज bus से यात्रा करते हैं। तस्मानिया सरकार के
July 1 तक सार्वजनिक परिवहन को मुफ्त करने के फैसले पर वे कहते हैं।
It will certainly be a help for us in the sense, ok means our
commuting experience will get reduced little. I took the option of, ok,
going by bus is ok to save or contribute to the environment. Ok, less carbon
-emissions, everything together. -पहले से 50% की छूट चलने के कारण अजीत जी का
साप्ताहिक खर्चा 20 डॉलर पर आ गया था, लेकिन अब वह भी बचत में जाएगा। उनका कहना
है कि हाल के माहौल में बढ़ते कॉस्ट ऑफ़ लिविंग के दबाव के चलते लोगों के लिए ये एक
अच्छी मदद तो होगी, लेकिन ये कितनी सतत रहती है, वो एक सवाल है।
It will certainly do a good impact. Whether it will change any habit patterns
of the people or not, that thing, ok, only if it is a consistent thing, people will
shift. Because somebody who is not using public transport
only for one or two weeks, it will-- it may not make them a change.
तस्मानिया के प्रीमियर जेरेमी रॉक्लिफ का कहना है कि बीते सप्ताह में ही सार्वजनिक
परिवहन में 20% यात्रियों की बढ़त देखी गई है। ऑस्ट्रेलिया में पहली बार डीज़ल की
कीमतें बीते सप्ताह तीन डॉलर प्रति लीटर के पार गई। ऐसे में कॉस्ट ऑफ़ लिविंग संकट फिर
से एक बार सामने आ रहा है। मेलबर्न से सलेहा सिंह कहती हैं।
The war continues. It is not just petrol prices. Everything will go up. Groceries
are going up. There are young people I know who are doing it tough.
Infrastructure में बहुत फर्क पड़ेगा because for tradies हम सुन रहे हैं कि उन
लोगों के लिए putting in petrol regularly will become so expensive कि हमारे लिए
new घर बनेंगे नहीं and Melbourne is expanding and expanding and it is not just
going to be for one month or two month. This will carry on and on in the sense,
you know, the cost of living pressuresIs just so high.
वे इस समय अपनी बेटी से भी नहीं मिल पा रही हैं।
मेरी बेटी
lives overseas. You know we have to go and meet with her.
अभी नहीं जा सकते हम। अब कब खत्म होगा, कब नहीं होगा। मैं I haven't met her now for
six months. It may be another six months before I go and see her.
मिडिल ईस्ट का यह संकट लोगों की कई चिंताओं का कारण बन रहा है। ऋतु मेनन और समरीन
-तबस्सुम को सुनिए। -यह कब तक चलेगा प्रॉब्लम किसी को नहीं पता।
तो बेटर रहेगा अगर अपन थोड़ा सा सोच समझ के चीजें करें। प्राइस बढ़ने के
साथ-साथ स्टॉक भी अवेलेबिलिटी भी कम होती जाएगी। जितना मैंने समझा है economics को 10
दिन में तो हर चीज में effect पड़ने लग जाएगा। यह फ्यूल सिर्फ स्टार्टिंग है। शिपमेंट
कम हो जाएगा। सामान कम अभी कोल्स में भी जाओगे,
आधे शेल्फ खाली दिखेंगे। तो चीजें कब अपने को पता नहीं चलेगा। लेकिन धीरे-धीरे
हर चीज सिर्फ पेट्रोल का ही नहीं, अपना ग्रोसरी हर चीज का पैसा बढ़ने वाला है।
फ्लाइट्स का आना-जाना बंद हो जाना, यह भी बहुत बड़ा impact है उन लोगों के लिए जो
airport पर काम करते हैं। जैसे कि मेरे husband, उनके काम पर तो बहुत असर पड़ रहा
है और obviously क्योंकि फ्लाइट्स का कैंसलेशन होना यह सब तो डेफिनिटेली और
फ्यूल के प्राइसेस तो बढ़ ही गए हैं। At the same time बाकी सारी चीजों के भी प्राइसेस बढ़
-गए हैं। -हालांकि विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा एलेन
कह चुकी हैं कि वे अपनी ताकत में जो संभव होगा वह विक्टोरियाई लोगों के लिए करेंगी।
लेकिन गहराते तेल संकट के बीच बाकी राज्य सरकारें क्या कदम उठाती हैं, यह देखना अभी
रहता है।
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत किए गए विचार निजी हैं। SBS ना ही उनसे सहमत है और ना ही
असहमत। एसबीएस हिंदी से आपके लिए इस रिपोर्ट को प्रस्तुत किया वृषाली जैन
ने।










